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हिमाचल: क्षेत्रवाद की खाई पाटने में पीछे नहीं रहे वीरभद्र, धर्मशाला में बनाई विधानसभा और शुरू किया शीतकालीन प्रवास
Fri, 09 Jul 2021 11:57 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अनिमेष कौशल, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अनिमेष कौशल, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 09 Jul 2021 11:57 AM IST
सार
वर्ष 2003-07 के कार्यकाल वाली वीरभद्र सरकार ने तपोवन में हिमाचल के दूसरे विधानसभा परिसर की नींव ऊपरी और निचले हिमाचल के बीच सत्ता का संतुलन साधने को रखी थी।
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पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के करीब 22 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह क्षेत्रवाद की खाई पाटने में भी पीछे नहीं रहे। निचले हिमाचल को साधने के लिए धर्मशाला में विधानसभा का निर्माण करवाया। शीतकालीन प्रवास शुरू कर सरकार को कुछ दिनों के लिए प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा से चलाया। वीरभद्र सिंह ने अपर हिमाचल और किन्नौर को भी पूरा अधिमान दिया। जिला सोलन के बद्दी, बरोेटीवाला और नालागढ़ (बीबीएन) और ऊना को औद्योगिक क्षेत्र के तौर पर विकसित किया।
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मंडी में प्रदेश का पहला क्लस्टर विश्वविद्यालय लाने का श्रेय भी वीरभद्र सिंह को जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपर और लोअर हिमाचल में समान रूप से विकास कार्य किए हैं। 25 दिसंबर 2006 को महज सात महीने के रिकॉर्ड समय में 35 हजार वर्ग फुट का तपोवन में नया विधानसभा परिसर बनवाया। वर्ष 2003-07 के कार्यकाल वाली वीरभद्र सरकार ने तपोवन में हिमाचल के दूसरे विधानसभा परिसर की नींव ऊपरी और निचले हिमाचल के बीच सत्ता का संतुलन साधने को रखी थी।
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तपोवन विधानसभा परिसर के निर्माण का मुख्य उद्देश्य केवल कांगड़ा सहित चंबा, हमीरपुर, ऊना और मंडी जिलों के लोगों को सरकार के और करीब लाना था। इन जिलों के लोगों को अपने कामों के लिए राजधानी शिमला तक सफर न करना पड़े। इसके लिए दिसंबर-जनवरी के दौरान शीतकालीन प्रवास की प्रथा भी शुरू की। इस प्रवास के दौरान वीरभद्र सिंह कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर के दौरे करते रहे।
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मंडी को साथ लाने के लिए 2014 में क्लस्टर विवि खोलने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। अथक प्रयासों के बाद सूबे को पहला क्लस्टर विवि वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने मंजूर करते हुए पहली किस्त में 24 करोड़ जारी किए थे। केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए वीरभद्र सिंह ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कई आउटलेट भी हिमाचल में खुलवाए।
हर विधानसभा क्षेत्र में वीरभद्र का रहा है निजी वोट बैंक
प्रदेश के 68 विधानसभा क्षेत्रों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का निजी वोट बैंक भी रहा है। इस वोट बैंक के चलते ही वीरभद्र सिंह की प्रदेश की राजनीति में तूती बोलती रही है। यही एक कारण भी रहा है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में वीरभद्र की इच्छा के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने टिकट दिए वहां कई जगह हार का मुंह भी देखना पड़ा।