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वीरभद्र और उनकी पत्नी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में समन, 22 मार्च को होने का निर्देश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 14 Feb 2018 09:56 AM IST
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virbhadra singh
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हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी समेत पांच लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट ने बतौर आरोपी समन जारी किया। कोर्ट के आदेश पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक फरवरी को इन सभी के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया था।
पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज संतोष स्नेही मान ने आरोपियों को मामले की अगली सुनवाई 22 मार्च को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है। ईडी ने बीमा एजेंट आनंद सिंह चौहान के खिलाफ सितंबर 2016 में चार्जशीट दाखिल की थी।
कोर्ट ने इसके मद्देनजर ईडी को पूरक आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। चौहान को 8 जुलाई 2017 को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी ने वीरभद्र, उनकी पत्नी के अलावा यूनिवर्सल ऐपल एसोसिएट के मालिक चुन्नी लाल चौहान, प्रेम राज व लवण कुमार रोच को पूरक आरोप पत्र में नामजद किया है।
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पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज संतोष स्नेही मान ने आरोपियों को मामले की अगली सुनवाई 22 मार्च को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है। ईडी ने बीमा एजेंट आनंद सिंह चौहान के खिलाफ सितंबर 2016 में चार्जशीट दाखिल की थी।
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कोर्ट ने इसके मद्देनजर ईडी को पूरक आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। चौहान को 8 जुलाई 2017 को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी ने वीरभद्र, उनकी पत्नी के अलावा यूनिवर्सल ऐपल एसोसिएट के मालिक चुन्नी लाल चौहान, प्रेम राज व लवण कुमार रोच को पूरक आरोप पत्र में नामजद किया है।
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ईडी ने सीबीआई के केस के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा दर्ज किया था। ईडी का आरोप था कि वीरभद्र ने 28 मई 2009 से 18 जनवरी 2011 और 19 जनवरी 2011 से 26 जून 2012 के दौरान केंद्रीय मंत्री रहते हुए आय से अधिक धन अर्जित किया था।
उस काले धन को वीरभद्र ने अन्य आरोपियों व आनंद सिंह के जरिए बीमा में निवेश किया था। सीबीआई के अनुसार आरंभिक जांच में पाया गया कि वीरभद्र सिंह ने दौरान 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर आय से अधिक अर्जित की थी।
उस काले धन को वीरभद्र ने अन्य आरोपियों व आनंद सिंह के जरिए बीमा में निवेश किया था। सीबीआई के अनुसार आरंभिक जांच में पाया गया कि वीरभद्र सिंह ने दौरान 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर आय से अधिक अर्जित की थी।