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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Vinegar will be made from low grade apples that are not sold in the market, scientists of Nauni University will produce

बाजार में न बिकने वाले लो ग्रेड सेब से बनेगा सिरका, नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक करेंगे उत्पादन

Sat, 03 Jul 2021 09:47 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
अमर उजाला नेटवर्क, सोलन Published by: Krishan Singh Updated Sat, 03 Jul 2021 09:47 PM IST
सार

विश्वविद्यालय की प्रौद्योगिकी से कृषि आय में सुधार के साथ-साथ बाजार में न बिकने वाले खराब क्वालिटी सेब का पूर्ण उपयोग कर सिरका बनाया जाएगा। 

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Vinegar will be made from low grade apples that are not sold in the market, scientists of Nauni University will produce
लो ग्रेड सेब से सिरका बनाने के लिए एमओयू साइन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बाजार में न बिकने वाले लो ग्रेड सेब से नौणी विश्वविद्यालय खाद्य विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक सिरका तैयार करेंगे। इसे जल्द ही मार्केट में भी उतारने की तैयारी चल रही है। वैज्ञानिक डीएसटी परियोजना के तहत विकसित प्रौद्योगिकी से इसका उत्पादन करेंगे। इसके तहत शनिवार को विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. रविंदर शर्मा ने शिमला की खाद्य प्रसंस्करण कंपनी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।

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इस अवसर पर रुहिल फूड प्रोसेसिंग यूनिट, शिमला से नंदा छजता और यशवंत छाजटा उपस्थित रहे। समझौते पर कुलपति डॉ. परविंदर कौशल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। डॉ. केडी शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय की प्रौद्योगिकी से कृषि आय में सुधार के साथ-साथ बाजार में न बिकने वाले खराब क्वालिटी सेब का पूर्ण उपयोग कर सिरका बनाया जाएगा। उन्होंने विभाग की ओर से विकसित कई अन्य तकनीकों और प्रक्रियाओं से अवगत करवाया, जो उद्यम के लिए फायदेमंद हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सेब के सिरके की मांग कई गुना बढ़ गई है।
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उत्पाद लेबल पर विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी का नाम लिखा जाएगा
डॉ अंजू धीमान, डीन कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर डॉ. केडी शर्मा, प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, खाद्य विज्ञान विभाग और डॉ राकेश शर्मा इस तकनीक को विकसित करने वाली टीम में शामिल हैं। यह दूसरा स्टार्टअप है। इसमें 40 हजार रुपये प्रौद्योगिकी शुल्क का भुगतान करके इस तकनीक के हस्तांतरण के लिए विश्वविद्यालय के साथ नॉन-एक्सक्लूसिव लाइसेंस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत कंपनी सेब का सिरका बनाने और बेचने के लिए विश्वविद्यालय की तकनीक का उपयोग करेगी और उत्पाद लेबल पर विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी का नाम लिखा जाएगा।

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