Shimla: भाजपा-एसएफआई के कार्यकर्ताओं में धक्कामुक्की और हाथापाई, दीप कमल में कांग्रेस ने दिया धरना
उपायुक्त कार्यालय के बाहर बुधवार दोपहर के समय उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब भाजपा और एसएफआई के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। । मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने फौरन बैरिकेडिंग की और सुरक्षा घेरा बनाकर किसी तरह से मामला शांत करवाया। वहीं कांग्रेस ने भाजपा राज्य मुख्यालय में जाकर धरना दिया।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के उपायुक्त कार्यालय के बाहर बुधवार दोपहर के समय उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब भाजपा और एसएफआई के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। इस दौरान दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और इसके बाद धक्कामुक्की और हाथापाई शुरू हो गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने फौरन बैरिकेडिंग की और सुरक्षा घेरा बनाकर किसी तरह से मामला शांत करवाया। पुलिस के आलाधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर भाजपा के नेताओं और एसएफआई के कार्यकर्ताओं से बातचीत कर उन्हें समझाकर स्थिति को संभाला। दोनों ही पार्टियों ने एक -दूसरे को उकसाने और हमला करने के आरोप लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार उपायुक्त कार्यालय के समीप वर्षाशालिका में एसएफआई के कार्यकर्ता पेपर लीक और जंतर-मंतर में युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में क्रमिक अनशन कर रहे हैं। वहीं बुधवार को भाजपा ने प्रधानमंत्री आवास के समीप कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के किए विरोध प्रदर्शन के विरोध में धरना प्रदर्शन आयोजित किया। दोपहर ढाई बजे के समीप भाजपा के नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपायुक्त कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए और प्रदर्शन शुरू किया। 3:30 बजे के करीब उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब दोनों ओर से कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इससे माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों और हाथापाई और धक्कामुक्की शुरू की। इस दौरान दोनों ओर से कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी भी हुई।
इस दौरान कुछ युवाओं ने झंडों के लिए इस्तेमाल होने वाले डंडों को भी निकाल लिया था। पुलिस ने स्थिति को बिगड़ता देखकर फौरन मोर्चा संभाला और बैरिकेडिंग करके सुरक्षा घेरा बनाकर दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग किया। एएसपी अमित ठाकुर और डीएसपी शक्ति सिंह ने दोनों पार्टियों के नेताओं से बातचीत कर उन्हें समझाकर मामला शांत करवाया। इसके बाद बीजेपी के कार्यकर्ता और नेता प्रदर्शन खत्म करने के बाद लौट गए और एसएफआई कार्यकर्ता भी शांत हो गए। किसी भी स्थिति को देखते हुए पुलिस बल घटनास्थल पर तैनात है। भाजपा नेताओं का कहना है कि एसएफआई के कार्यकर्ता उनके प्रदर्शन में घुस गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इससे ही माहौल तनावपूर्ण हो गया है। वहीं आधे घंटे तक चले इस दोनों पार्टियों के बीच हुई इस धक्कामुक्की के कारण मालरोड और लोअर बाजार आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मार्ग अवरुद्ध होने के कारण लोग काफी देर तक सीटीओ चौक से आवाजाही नहीं कर सके। बुधवार शाम तक इस पूरे प्रकरण को लेकर किसी भी तरफ से पुलिस स्टेशन में शिकायत नहीं दी गई है।
सीटू–एसएफआई ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बनाया हिंसक, प्रशासन बना मूकदर्शक : कटवाल
भाजपा के प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल ने कहा कि सीटीओ पर भाजपा की ओर से प्रशासन से अनुमति लेकर किए जा रहे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को सीटू और एसएफआई से जुड़े लोगों ने सुनियोजित तरीके से बाधित करने का प्रयास किया। यह केवल भाजपा के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला नहीं बल्कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है। भाजपा का विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण आयोजित किया जा रहा था। इसके बावजूद सीटू कार्यकर्ता छात्रों की आड़ लेकर बिना अनुमति के वहां पहुंचे और जानबूझकर माहौल को तनावपूर्ण बनाने का प्रयास किया। सीटू के नेताओं ने स्वयं भीड़ में घुसकर छात्रों, विशेषकर छात्राओं को आगे कर उन्हें भड़काया और टकराव की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि पूरी घटना के दौरान प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। भाजपा के कार्यक्रम में नियम-कानून लागू करने वाला प्रशासन बिना अनुमति पहुंचे सीटू और एसएफआई के कार्यकर्ताओं पर कोई कार्रवाई करने की बजाय उन्हें खुला संरक्षण देता रहा। इससे साफ है कि प्रशासन निष्पक्ष होकर नहीं, बल्कि सुक्खू सरकार के राजनीतिक इशारों पर कार्य कर रहा है।
महिला समिति ने धक्का-मुक्की का किया विरोध
वहीं अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य कमेटी ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर हुई धक्का-मुक्की की कड़ी निंदा की है। साथ ही भाजपा की ओर से लड़कियों के साथ धक्का-मुक्की करना गलत है। वहीं भाजपा पर कई आरोप भी समिति ने लगाए हैं। समिति की महासचिव फालमा चौहान ने बताया कि एसएफआई के छात्र बीते तीन दिनों से देश में नीट का पेपर बार-बार लीक होने के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इन्होंने मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर पूरे देश में और हिमाचल प्रदेश में भूख भी की लेकिन भाजपा व अरएसएस की मिलीभगत से मुद्दा भड़काने के प्रयास हो रहे हैं।
दीपकमल के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन, भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ता हुए आमने-सामने
राजधानी शिमला में बुधवार को भाजपा कार्यालय दीपकमल के बाहर उस समय राजनीतिक माहौल खूब गर्मा गया, जब कांग्रेस ने विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस और भाजपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ता एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे। राजीव भवन शिमला में कांग्रेस सेवादल के अधिवेशन के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने दीपकमल चक्कर की ओर कूच किया। बालूगंज तक कांग्रेस कार्यकर्ता गाड़ियों में गए और वहां से चक्कर तक पैदल मार्च किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हाथों में पार्टी के झंडे थे। वे केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े, लेकिन दीपकमल पहुंचने से पहले ही उन्हें पुलिस बल ने रोक दिया। दीपकमल के दूसरी ओर भाजपा भी आक्रामक रुख में रही। भाजपा के कार्यकर्ता झंडे उठाकर कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। इससे पहले भाजपा ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर भी धरना-प्रदर्शन किया। वहीं, इससे पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी के शिमला स्थित कार्यालय में कांग्रेस सेवादल का अधिवेशन भी आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू समेत कांग्रेस संगठन के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को छात्र आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए जाने को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए भाजपा सरकार के खिलाफ लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रही है। पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रही है। उधर, भाजपा राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विरोध-प्रदर्शन कर रही है। दोनों दलों के लगातार प्रदर्शनों के चलते राजधानी शिमला में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है।
कांग्रेस तब तक सड़कों पर रहेगी, जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते : जिंटा
कांग्रेस के संगठन महासचिव विनोद जिंटा ने कहा कि नीट छात्रों पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने लाठियां भांजने का काम किया। उन्हें मारा जाता है और पीटा जाता है व जबरदस्ती जेल में डालने का प्रयास किया जाता है। सोनम वांगचुक को भी अनशन से जबरन उठाकर ने जाया जाता है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने पर इस तरह का बर्ताव किया जाता है। कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर छात्रों के समर्थन में खड़ी है। कांग्रेस तब तक सड़कों पर रहेगी, जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते हैं। केंद्र सरकार अलोकतांत्रिक व्यवहार कर रही है।
बिना अनुमति किया गया प्रदर्शन अस्वीकार्य : संजय
भाजपा के प्रदेश सचिव संजय ठाकुर ने कहा कि पार्टी मुख्यालय दीपकमल के बाहर किया गया प्रदर्शन अनैतिक और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध था। कांग्रेस नेताओं के पास भाजपा मुख्यालय का घेराव करने की कोई वैधानिक अनुमति नहीं थी, इसके बावजूद कांग्रेस ने जबरन प्रदर्शन कर कानून व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास किया। संजय ठाकुर ने कहा कि इस पूरे अनैतिक घेराव का नेतृत्व स्वयं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने किया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। एक जिम्मेदार राजनीतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष से लोकतांत्रिक मूल्यों के पालन की अपेक्षा की जाती है। यह स्पष्ट करता है कि कांग्रेस अब जनहित के मुद्दों से भटककर केवल टकराव और राजनीतिक अशांति पैदा करने की राजनीति कर रही है।