तिब्बत के समर्थन में जर्मनी, चीन को दी सलाह
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हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला पहुंचीं जर्मन संसद की उपाध्यक्ष कलाउडिया रोथ ने तिब्बती लोगों का समर्थन किया है। मैकलोडगंज में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने चीन सरकार से धर्मगुरु दलाईलामा के प्रतिनिधियों से तिब्बत की वास्तविक स्वायत्तता पर वार्ता फिर शुरू करने का आग्रह किया।
लंबे समय से तिब्बत की समर्थक रहीं रोथ 10 मार्च को मैकलोडगंज में होने वाले तिब्बत के राष्ट्रीय विद्रोह दिवस के सरकारी समारोह में भाग लेने पहुंची हैं।
उन्होंने कहा कि वह तिब्बत के अच्छे दोस्त के रूप में धर्मशाला आई हैं। तिब्बती लोगों के दुख, समस्याओं और उनके आंसुओं को पोंछकर चेहरों पर हंसी लाने की कोशिश कर रही हैं।
इंसान होने के नाते हमारा कर्त्तव्य है कि तिब्बत मुद्दे को भूलने न दिया जाए। अगर इसे भुला दिया गया तो तिब्बत के लोगों की संस्कृति ओझल हो जाएगी।
मध्य मार्ग की नीति स्वीकार करे चीन
उन्होंने तिब्बत मुद्दे के समाधान को निर्वासित तिब्बत सरकार की मध्य मार्ग नीति का समर्थन किया। चीन सरकार से अनुरोध किया कि वह मध्य मार्ग नीति को स्वीकार करे।
विश्व के अन्य देशों से भी तिब्बतियन आंदोलन को समर्थन करने का आग्रह किया। निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डा. लोबसंग सांग्ये ने जर्मन संसद की उपाध्यक्ष का निमंत्रण स्वीकारने पर धन्यवाद किया।
कहा कि 56वें तिब्बतियन राष्ट्रीय विद्रोह दिवस पर होने वाले सरकारी कार्यक्रम में रोथ मुख्यातिथि होंगी। कलाउडिया धर्मगुरु दलाईलामा से भी मिलेंगी। तीन दिवसीय दौरे के दौरान तिब्बतियन संस्थानों का दौरा करेंगी।