अब यहां विसर्जित नहीं हो पाएंगी सिंहल की अस्थियां
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विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंहल की अस्थियों को अब अगले साल रोहतांग दर्रा खुलने बाद ही चंद्रभागा नदी में प्रवाहित किया जाएगा। तब तक अस्थि कलश को लोगों के दर्शन के लिए मनाली स्थित बौद्ध मठ में रखा जाएगा।
इससे पहले अशोक सिंहल के अस्थि कलश को दर्शन के लिए मनाली के रामबाग में रखा गया है। विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष मनोज ने बताया कि पहले 28 नवंबर को अस्थि कलश चंद्रभागा नदी में प्रवाहित करने का कार्यक्रम था, लेकिन बर्फबारी के कारण रोहतांग दर्रा बंद हो गया है।
अगले साल रोहतांग दर्रा खुलने के बाद होगा विसर्जन
लिहाजा, अब अगले साल रोहतांग दर्रा खुलने के बाद हिंदू और बौद्ध धर्म की रीति के अनुसार उनके अस्थि कलश को प्रवाहित किया जाएगा। हिमाचल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डा. चंद्रमोहन परशीरा ने कहा कि अशोक सिंहल के अस्थि कलश को यहां बहाने के साथ तांदी संगम एक धार्मिक पर्यटन के तौर पर भी विख्यात होगा।
भारतीय इतिहास संकलन समिति के सदस्य छेरिंग दोरजे ने चंद्रभागा नदी के एतिहासिक और धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस नदी का जिक्र वेदों में भी किया गया है। इसका पौराणिक नाम अस्किनी है।