शोध में चौंकाने वाला खुलासा, ये दवा खा रहे हैं तो हो सकता है कैंसर
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भारत समेत अन्य देशों में चर्म रोग के लिए इस्तेमाल होने वाली इस दवा से कैंसर का खतरा है। शोध के दौरान यह चौंका देने वाला खुलासा हुआ है। भारत समेत अन्य देशों में चर्म रोग के लिए इस्तेमाल होने वाली डॉक्सीसाइक्लीन दवा से कैंसर का खतरा है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) एंड पीजीआई चंडीगढ़ में शोध के दौरान यह चौंका देने वाला खुलासा हुआ है। हमीरपुर के वार्ड नंबर चार की डॉ. नेहा नंदा ने इस रिसर्च वर्क पर कार्य किया है। डॉ. नेहा नंदा ने कैंसर पर शोध के दौरान डॉक्सीसाइक्लीन दवा का कैंसर ग्रस्त चूहों और स्वस्थ चूहों पर प्रयोग किया।
प्रयोग करने के बाद यह आया सामने
इस दवा के इस्तेमाल के बाद कैंसर से ग्रस्त चूहों पर यह दवा कारगर साबित नहीं हुई। लेकिन स्वस्थ चूहों की आंतों में छोटे-छोटे ट्यूमर बनने शुरू हो गए। अमेरिका की पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस की प्रतिष्ठित पत्रिका पलोस-वन में भी डॉ. नेहा नंदा का शोध प्रकाशित हुआ है।
शोध में कैंसर की पुष्टि होने के बाद डॉ. नेहा नंदा ने अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से इस दवा पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने डब्ल्यूएचओ से इस दवा के प्रभाव के नए सिरे से शोध करवाने की मांग है ताकि अनजाने में इस दवा के प्रयोग से कैंसर को बढ़ावा न मिले।
जेआरएफ में हासिल किया था देशभर में 18वां रैंक
डॉ. नेहा ने जूनियर रिसर्च फैलोशिप की परीक्षा में देशभर में 18वां रैंक हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी और पीजीआई चंडीगढ़ के संयुक्त तत्वाधान में पीएचडी की डिग्री हासिल की।
वर्तमान में डॉ. नेहा इंडो-स्वीडन प्रोजेक्ट में सीनियर रिसर्च फेलो के तौर पर कार्यरत हैं। हाल ही में उन्हें पंजाब के राज्यपाल ने पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया है।
इसलिए होता है इस दवा का प्रयोग
जिला अस्पताल हमीरपुर में सेवारत स्किन स्पेशलिस्ट डॉ. नीरज शर्मा ने कहा कि डॉक्सीसाइक्लीन दवा को ब्रॉड स्पेक्ट्रम माना जाता है। इस दवा का प्रयोग स्किन इन्फेशन के इलाज के अलावा स्क्रब टायफस, मुहासों, डायरिया और अन्य बीमारियों समेत एंटीबायोटिक के तौर पर किया जाता है। अगर डॉक्सीसाइक्लीन से कैंसर का खतरा है तो डब्ल्यूएचओ को इस पर शोध करवाना चाहिए।