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उम्मीद की मशाल: पांच रुपये में भरपेट खाना परोस रही समाजसेवी सिंगला की रसोई

Mon, 16 May 2022 12:07 PM IST
अरविन्द ठाकुर संजय गुप्ता, संवाद न्यूज एजेंसी, कालाअंब (सिरमौर)
संजय गुप्ता, संवाद न्यूज एजेंसी, कालाअंब (सिरमौर) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 16 May 2022 12:07 PM IST
सार

इस समय एक ओर जहां होटलों व ढाबों में भोजन की साधारण थाली 80 से 100 रुपये में परोसी जा रही है, वहीं माता बालासुंदरी अन्नपूर्णा भोजनालय में भरपेट भोजन मात्र पांच रुपये में उपलब्ध करवाया जा रहा है।

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माता बालासुंदरी अन्नपूर्णा भोजनालय। - फोटो : संवाद

विस्तार

महंगाई के बीच आज हर रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। लेकिन यहां एक ऐसी रसोई भी है, जहां पांच रुपये में लोगों को भरपेट खाना परोसा जा रहा है। रोजाना यहां 700 से 800 लोग भोजन के लिए पहुंचते हैं। खास बात यह भी है कि जिसके पास पांच रुपये नहीं, वह भी भूखा नहीं लौटता। यह रसोई पिछले पांच साल से चल रही है। 

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दरअसल, इस सेवा को कालाअंब के समाजसेवी एवं उद्यमी संजय सिंगला ने शुरू किया है। इस समय एक ओर जहां होटलों व ढाबों में भोजन की साधारण थाली 80 से 100 रुपये में परोसी जा रही है, वहीं उनके द्वारा संचालित माता बालासुंदरी अन्नपूर्णा भोजनालय में रोजाना सैकड़ों कामगारों को दोपहर का भरपेट भोजन मात्र पांच रुपये में उपलब्ध करवाया जा रहा है। 
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इस भोजनालय में रोजाना विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के सैकड़ों कामगार भोजन करने आ रहे हैं। भोजन पकाने के लिए बाकायदा कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। 100 लोगों के एक साथ बैठकर भोजन करने की व्यवस्था की गई है। इस भोजनालय से औद्योगिक इकाइयों के सैकड़ों कामगारों के अलावा से बाहरी लोग व गरीब बच्चे भी लाभान्वित हो रहे हैं, जिनसे कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।
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माता की आज्ञा हुई और शुरू कर दिया काम 
माता की आज्ञा हुई और कार्य शुरू कर दिया। कभी यह नहीं देखा कि भोजनालय चलाने में कितना खर्च हो रहा है। माता बालासुंदरी की असीम कृपा व आशीर्वाद से यह प्रेरणा मिली है। पांच रुपये भी सेवा राशि के रूप में लिए जा रहे हैं ताकि किसी के मन में यह भाव न आए कि वह मुफ्त में भोजन खा रहा है।  - संजय सिंगला, समाजसेवी एवं उद्योगपति।


कालाअंब के उद्यमी व समाज सेवी संजय सिंगला इस पुनीत व नेक काम के माध्यम से दूसरों के लिए मिसाल कायम कर रहे हैं। उनके जैसी सच्ची लगन व दृढ़ इच्छाशक्ति से समाज के उत्थान के लिए कुछ भी किया जा सकता है। - इस्लाम मोहम्मद, उपप्रधान ग्राम पंचायत कालाअंब

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