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दो बेटियों की जिद के आगे झुका समाज, बंद हुई पशु बलि प्रथा

Mon, 29 Feb 2016 09:55 AM IST
Updated Mon, 29 Feb 2016 09:55 AM IST
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Two sisters in mandi aware people to ban animal sacrifice.

हिमाचल के मंडी जिले की दो नन्ही बहनें पशु बलि रोकने में दूसरों के लिए प्रेरणा बन गईं। दोनों की जिद्द ने हिमाचल में सदियों से चली आ रही इस प्रथा पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बेटियों की इस पहल से पंजाई क्षेत्र के देव पुंडरीक ऋषि मंदिर में बलि न देने का फैसला लिया गया। देखादेखी अन्य मंदिरों में भी बलि प्रथा बंद की गई।

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मंडी के सराज क्षेत्र के थाची गांव की परिष्टि और अविष्टि की मिसाल अब हर गांव और हर घर में दी जाती है। भले ही सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट ने पशु बलि पर रोक लगाई हो, लेकिन देवभूमि के मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर पशु बलि दी जाती रही है। चार साल पहले अपने गांव के मंदिर में पशु बलि देख दोनों बच्चियों का दिल पसीज गया। उन्होंने पिता डॉ. आरआर ठाकुर को साथ लेकर इसके खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी।
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परिष्टि उस समय छह और अविष्टि महज तीन साल की थी। गांव-गांव जाकर देवताओं के कारिंदों को मनाने की मुहिम शुरू की। परिष्टि और अविष्टि ने वर्ष 2013 में बलि प्रथा को खत्म करने के लिए पंजाई, काओ, डोभा, छेत, बछाहड़, मुहलू, बसाण, सेगला आदि गांवों के लोगों को साढ़े चार सौ से अधिक पत्र लिखे। पुजारियों को मनाया।
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जम्मू-कश्मीर में बाढ़ प्रभावितों की इस तरह की मदद

Two sisters in mandi aware people to ban animal sacrifice.

यही नहीं प्रदेश सरकार और न्यायपालिका के साथ भी लगातार पत्राचार किया और पशु बलि पर रोक की मांग की। उनकी मुहिम रंग लाई। कोर्ट के आदेशों और जागरूकता के कारण ही आज सूबे में लगभग पशु बलि का खात्मा हो गया है। दस वर्षीय परिष्टि और सात साल की अविष्टि अब बलि प्रथा के अलावा छुआछूत, बाल विवाह और स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं।

दोनों ने पिछले साल बाढ़ से जम्मू-कश्मीर में हुए भारी नुकसान से प्रभावितों के लिए आर्थिक मदद जुटाई। बालीचौकी मेले में दोनों बहनों ने काफल (जंगली फल) बेचकर 3222 रुपये एकत्र किए। 2100 की राशि जम्मू कश्मीर आपदा पीड़ितों के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष में दी और 1122 रुपये की राशि से गरीब बच्चों को कॉपियां तथा पेंसिल बांटी। स्वच्छता के प्रति भी दोनों बेटियों ने हाल ही में ग्राम पंचायत काओ में हर घर का सर्वे किया। दोनों बेटियां अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगी।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला थाची में भूगोल प्रवक्ता डॉ. आरआर ठाकुर ने बताया कि उनकी बेटी परिष्टि और अविष्टि ने वर्ष 2013 में बलि प्रथा को खत्म करने के लिए एक दर्जन गांवों के लोगों को साढ़े चार सौ से अधिक पत्र लिखे। बेटियों के लगातार पत्राचार से पंजाई क्षेत्र के देव पुंडरिक ऋषि के मंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में बलि प्रथा पर रोक लगाई गई। देवता के मंदिर में नारियल से धार्मिक अनुष्ठान करवाया जाता है।

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