250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच से बाहर हुए दो निजी विवि
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करीब 250 करोड़ रुपये के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले की जांच से दो निजी विश्वविद्यालय को छुटकारा मिल गया। लवली यूनिवर्सिटी जालंधर और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी को लेकर सीबीआई को प्रथम दृष्टया जांच में गड़बड़ी साबित करने वाला कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। ऐसे में इन दोनों विश्वविद्यालयों को उस सूची से बाहर कर दिया गया है, जिन पर जांच बैठाई गई है। सीबीआई के हाथ शुरुआती दौर में जिन 27 संस्थानों की सूची आई थी, उनमें ये दोनों विवि भी शामिल रहे हैं।
अब सीबीआई ने संस्थानों को शॉर्ट लिस्ट कर 22 पर ही जांच बैठाई है। 27 संस्थानों में से दो ये निजी विश्वविद्यालय हैं, तो तीन सरकारी संस्थान बताए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो सीबीआई के समक्ष ये दोनों ही विश्वविद्यालय अपनी बेगुनाही के सुबूत दे चुके हैं। एक विश्वविद्यालय तो हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर नई दिल्ली तक अपने निर्दोष होने की बात रख चुका है। सीबीआई ने इन दोनों ही विश्वविद्यालयों पर इसीलिए छापे भी नहीं मारे हैं, क्योंकि आरोप साबित करने के प्रारंभिक सुबूत नहीं मिल पाए।
शिक्षा विभाग के तत्कालीन वरिष्ठ सहायक की बड़ी भूमिका
सीबीआई जांच में शिक्षा विभाग की स्कॉलरशिप शाखा में तत्कालीन वरिष्ठ सहायक की बड़ी भूमिका सामने आ रही है। अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी विद्यार्थियों के नाम पर फर्जी छात्रवृत्ति जारी करने में इस वरिष्ठ सहायक का बड़ा रोल रहा है।
हालांकि, इस कर्मचारी से ऊपर के कई वरिष्ठ अधिकारियों के बारे में भी गहन सुबूत जुटाए जा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि अगर फर्जी छात्रवृत्ति जारी करने के लिए कमीशन लिया जाता था तो वरिष्ठ सहायक अकेला ही इसे वसूल करता था या उन अधिकारियों की भी इसमें भूमिका रही है।