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उपलब्धि: ट्रांजिस्टर की ब्रेकडाउन वोल्टेज क्षमता ढाई गुना बढ़ाई, एनआईटी के शोधार्थियों ने किया शोध

Tue, 22 Jul 2025 04:57 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Published by: Krishan Singh Updated Tue, 22 Jul 2025 04:57 PM IST
सार

एनआईटी हमीरपुर के सह प्राध्यापक और शोधार्थियों के शोध को संयुक्त राज्य अमेरिका पेटेंट और ट्रेडमार्क कार्यालय से मंजूरी मिली है। 

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Transistor breakdown voltage capacity increased by two and a half times, research done by NIT professors and r
डॉ. गार्गी खन्ना, छात्र अरिहंत राज, पीएचडी स्कॉलर डॉ. प्रिया कौशल। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के एनआईटी हमीरपुर के सह प्राध्यापक और शोधार्थियों के शोध को संयुक्त राज्य अमेरिका पेटेंट और ट्रेडमार्क कार्यालय से मंजूरी मिली है। संस्थान का पहला अमेरिकन पेटेंट मंजूर हुआ है। हाई इलेक्ट्रॉन मोबिलिटी ट्रांजिस्टर को विकसित कर संस्थान के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग विशेषज्ञों ने वैश्विक स्तर पर प्रदेश और देश का नाम चमकाया है। हाई इलेक्ट्रॉन मोबिलिटी ट्रांजिस्टर विकसित कर इसकी ब्रेकडाउन क्षमता को ढाई गुना बढ़ाया गया है। आम ट्रांजिस्टर को गैलियम आर्सेनाइड का इस्तेमाल कर बनाया जाता है, लेकिन इस ट्रांजिस्टर को सिलिकॉन कार्बाइड नाम की मजबूत सामग्री से निर्मित किया गया है।

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इसमें द्वि-आयामी (टूडी) सामग्री भी शामिल है। इस अनोखी डिजाइन से ट्रांजिस्टर के अंदर इलेक्ट्रॉनों के सिग्नल भेजने की गति तेज होती है। यह तकनीक विशेष रूप से उन इलेक्ट्रॉनिक सर्किटों (चिप) के लिए उपयोगी है, जो कि उच्च शक्ति और गति के साथ कार्य करते हैं। आम तौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों की पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल रडार सिस्ट्म और रक्षा क्षेत्र के हाई स्पीड कम्युनिकेशन उपकरण में इनका प्रयोग होता है। इन उपकरणों के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में इंटीग्रेटिड सर्किट यानी चिप को संदेश भेजने के कार्य को ट्रांजिस्टर के माध्यम से किया जाता है। इसकी ब्रेकडाउन वोल्टेज की क्षमता पहले 300 तक सीमित थी, जो कि इस शोध से अब 800 तक बढ़ाई गई है। 

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संस्थान के निदेशक बोले, वैश्विक नवाचार की दिशा में अहम कदम
संस्थान के निदेशक डॉ. एचएम सूर्यवंशी एवं रजिस्ट्रार डॉ. अर्चना संतोष नानोटी एनआईटी हमीरपुर को उन्नत अनुसंधान और नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी उत्कृष्टत्ता को उजागर करती है, बल्कि एनआईटी हमीरपुर को वैश्विक नवाचार अहम सफलता है।  इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी कुमार राणा ने कहा कि सह प्राध्यापक डॉ. गार्गी खन्ना, पीएचडी स्कॉलर डॉ. प्रिया कौशल और एमटेक के छात्र अरिहंत राज ने बीते वर्ष अमेरिकन पेटेंट कार्यालय में इस शोध के पेटेंट के लिए आवेदन किया था। अब मंजूरी मिलने से वैश्विक स्तर पर एनआईटी को पहला पेटेंट मंजूर हुआ है।

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