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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Transfer order on recommendation of Congress leader canceled by High Court

Himachal News: कांग्रेस नेता की सिफारिश पर हुए तबादला आदेश हाईकोर्ट से रद्द

Wed, 29 Mar 2023 07:28 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 29 Mar 2023 07:28 PM IST
सार

 कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र भारद्वाज ने लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता की जनजातीय क्षेत्र में दोबारा स्थानांतरण की सिफारिश की थी। प्रदेश हाईकोर्ट ने राजनीतिक हस्तक्षेप पर हुए तबादला आदेश को रद्द कर दिया है। 

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Transfer order on recommendation of Congress leader canceled by High Court
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राजनीतिक हस्तक्षेप पर हुए तबादला आदेश को रद्द कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र भारद्वाज ने लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता की जनजातीय क्षेत्र में दोबारा स्थानांतरण की सिफारिश की थी। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किए। याचिकाकर्ता शैलेष कुमार ने आरोप लगाया था कि विभाग ने नेता की सिफारिश पर बिना सोचे समझे उसका तबादला किया है। दलील दी गई कि उसने वर्ष 1996 से 2008 तक जनजातीय क्षेत्र गरोला में अपनी सेवाएं दी थी। स्थानांतरण पॉलिसी के तहत किसी भी कर्मचारी को दोबारा से जनजातीय क्षेत्र में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता के अनुसार वह लोक निर्माण विभाग उपखंड नकरोड में सहायक अभियंता के पद पर तैनात था।

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इस स्थान पर अभी याचिकाकर्ता ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया था। इसके बावजूद विभाग ने राजनीतिक सिफारिश पर ही उसका तबादला किया है। आरोप लगाया गया था कि उसे राजनीतिक द्वेष के कारण स्थानांतरित किया गया है। हालांकि विभाग के पास याचिकाकर्ता को स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं थी। स्थानीय कांग्रेस नेता के निर्देशों के बाद ही विभाग ने स्थानांतरित पॉलिसी के विरुद्ध उसका तबादला किया है। इन तबादला आदेशों में कोई भी जनहित और प्रशासनिक जरूरत नहीं है। आरोप लगाया गया है कि याचिकाकर्ता का तबादला प्रताड़ित करने के लिए किया गया है। दलील दी गई कि राजनीतिक द्वेष के चलते किए गए तबादले हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसके तबादला देशों को रद्द किया जाए।
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10 बाई 12 फुट के कमरे से पुलिस ने पकड़े 51 जुआरी, अदालत ने किए बरी
जिला अदालत चक्कर ने 51 नामित जुआरियों को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिमला ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आरोपियों की अपील को स्वीकार किया है। निचली अदालत ने सभी आरोपियों को अदालत की कार्यवाही तक कोर्ट में बैठे रहने और सौ-सौ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस निर्णय को 18 आरोपियों ने अपील के माध्यम से अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिमला की अदालत में चुनौती दी थी। मामले के अनुसार 16 अक्तूबर 2014 की रात नौ बजे पुलिस थाना चौपाल को गुप्त सूचना मिली थी कि स्थानीय निवासी राजेंद्र ठाकुर के निर्माणाधीन मकान में कुछ लोग जुआ खेल रहे हैं। नौ पुलिस कर्मियों की टीम ने मौके पर जाकर 51 अरोपियों को ताश की तीन गड्डियों और 1.26 लाख रुपये की नकदी के साथ पकड़ा था। मामले की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायिक दंडाधिकारी चौपाल की अदालत में अभियोग चलाया।
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निचली अदालत ने सभी आरोपियों को जुआ खेलने का दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। अपील की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि पुलिस ने उन्हें फंसाने की कोशिश की गई है। जिस कमरे से पुलिस ने उन्हें पकड़ा है, वह केवल 10 बाई 12 फुट का कमरा है। इतने से कमरे में 51 लोग मिलकर जुआ नहीं खेल सकते हैं। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन पर पाया कि पुलिस ने नियमानुसार मकान की तलाशी में स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किए हैं। अदालत ने पाया कि पुलिस ने जानबूझ कर कमरे के आकार के बारे में जांच में कुछ नहीं लिखा है। इससे प्रतीत है कि पुलिस कमरे के आकार के बारे में कुछ छुपाने की कोशिश कर रही है। पुलिस जांच की विसंगतियों और पुलिस के विरोधाभासी बयानों के आधार पर आरोपियों को सजा नहीं दी जा सकती है। अदालत ने निचली अदालत को खारिज करते हुए आरोपियों की अपील को स्वीकार कर दिया।

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