कालका-शिमला ट्रैक पर बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार, ट्रायल को लगाए सेंसर
यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित शिमला कालका रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों की स्पीड 25 से बढ़ाकर 35 किलोमीटर प्रति घंटा करने के लिए शिमला रेलवे स्टेशन में तैयारियां शुरू हो गईं। ट्रेन की स्पीड बढ़ाने को ट्रायल के लिए लखनऊ से आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन) की टीम शिमला आई है। शनिवार को टीम ने नैरो गेज डीजल शेड कालका से लाए लोको 706 (इंजन) में स्पीड मापने के उपकरण फिट किए।
सुबह पौने बारह बजे आरडीएसओ की 12 सदस्यीय टीम रेलवे स्टेशन के लोको शेड में पहुंची और सेंसर फिट किए। चलती गाड़ी में पिस्टन से सेंसर को क्षति न पहुंचे इसके लिए खास एहतियात बरती गई। इंजन में स्पीडोमीटर, यूपीएस, कंट्रोलर, डाटा लॉगर और बैटरी भी फिट की गई। शिमला से शोघी तक लगातार तीन दिन होने वाले ट्रायल को लेकर टीम ने पूरे ट्रैक के कर्व, टनल और स्टेशनों की विस्तृत जानकारी हासिल की।
ट्रायल के दौरान जीपीएस से स्पीड मापने को लेकर भी अधिकारियों ने चर्चा की। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल के आदेशों पर कालका शिमला ट्रैक पर गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने के लिए ट्रायल शुरू किए जा रहे हैं। मौजूद समय में 96 किलोमीटर की दूरी तय करने में ट्रेनों को 5 घंटों से अधिक का समय लग जाता है, ट्रेन की स्पीड बढ़ाकर इसे 3 घंटे करने की तैयारी है। शनिवार को रेलवे स्टेशन में डायरेक्टर टेस्टिंग की अगुवाई में असिस्टेंट रिसर्च इंजीनियर सहित सुपर विजन स्टॉफ देर शाम तक ट्रायल की तैयारियों में जुटा रहा।
48 डिग्री के तीव्र घुमाव और सुरंगें बन सकती हैं परेशानी
कालका शिमला ट्रैक पर 48 डिग्री तक तीव्र घुमावदार मोड़ हैं। इन मोड़ों पर ट्रेन की स्पीड बढ़ाना बेहद पेचीदा काम साबित हो सकता है। इतना ही नहीं ट्रैक के कई हिस्सों पर हर सौ से डेढ़ सौ मीटर पर टनल भी परेशानी का सबब साबित हो सकती है। आरडीएसओ की टीम ट्रेन की रफ्तार मानकों के अनुसार जीपीएस की मदद से मापना चाहती है लेकिन टनल के भीतर जीपीएस सही तरीके से काम नहीं करता।
जतोग और तारादेवी के बीच स्टेट ट्रैक पर बढ़ाई जाएगी स्पीड
शिमला और शोघी के बीच होने वाले हाई स्पीड ट्रायल के लिए आरडीएसओ की टीम ने जतोग और तारादेवी के बीच का स्टेट ट्रैक चुना है। इस ट्रैक पर पहले चरण में साढ़े 22 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से इंजन दौड़ाया जाएगा।