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प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों की ट्रेनिंग को लेकर विवाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 26 Feb 2018 01:12 PM IST
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प्रदेश में आने वाले प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों की ट्रेनिंग को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विभाग के आला अधिकारियों की सिफारिश पर अब ट्रेनी अफसरों को प्रमोटी आईपीएस अफसरों के अधीन नहीं लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत हाल में प्रदेश में ट्रेनिंग पर आए तीन प्रशिक्षु आईपीएस में से दो को ट्रेनिंग के बीच ही स्थानांतरित कर दिया गया है।
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बताया जा रहा है कि दोनों का तबादला इसलिए किया गया है, क्याेंकि उनके जिले में पहले डायरेक्ट आईपीएस एसपी के पद पर तैनात थे, लेकिन अब वहां प्रदेश पुलिस सेवा से पदोन्नत होकर आए अफसर तैनात हैं।
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प्रमोटी अफसरों की तैनाती के बाद ही सरकार ने दो प्रशिक्षु आईपीएस का तबादला कर दिया है। प्रदेश कैडर मिलने के बाद 2016 बैच के तीन प्रशिक्षु आईपीएस अफसर आकृति शर्मा, वत्सला और अभिषेक यादव जिला प्रैक्टीकल प्रशिक्षण द्वितीय चरण के लिए हिमाचल पहुंचे।
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करीब साल भर एसपी ऑफिस से लेकर पुलिस थाने तक तैनात रहकर पुलिसिंग सीखने के लिए प्रदेश सरकार ने आकृति शर्मा को जनवरी महीने में शिमला, वत्सला गुप्ता को मंडी और अभिषेक यादव को कुल्लू में तैनाती दी।
इसी बीच शिमला और मंडी एसपी का तबादला हो गया। दोनों जगह प्रदेश पुलिस सेवा से पदोन्नत होकर आईपीएस बने अफसर तैनात हो गए।
दोनों की तैनाती के कुछ दिन बाद ही सरकार ने आकृति और वत्सला का तबादला शिमला से हमीरपुर और मंडी से बिलासपुर कर दिया। चूंकि, कुल्लू में अभी भी डायरेक्ट आईपीएस एसपी हैं, इसलिए वहां तैनात अभिषेक का तबादला नहीं किया गया।
अगर अखर रहे तो न करें पदोन्नत
नाम न लिखने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि अगर सरकार और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को प्रदेश पुलिस सेवा से पदोन्नत होकर आईपीएस बने अफसरों पर भरोसा नहीं है और उनके लिए सम्मान ही नहीं है तो प्रदेश पुलिस सेवा से उन्हें पदोन्नत ही नहीं किया जाना चाहिए। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि ऐसा करने से प्रदेश में पुलिस अफसरों के बीच असंतोष बढ़ेगा।