प्रशासन का फैसला: लाहौल के अंतिम गांव दारचा की वादियां भी निहार सकेंगे पर्यटक
मौसम खुलने और तापमान बढ़ने से बर्फ पिघलने की रफ्तार तेज होते ही घाटी में सैलानियों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी है। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग भी अब अपने ढाबों ओर होटलों को करीब दो से तीन महीने बाद फिर से खोलने लगे हैं।
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मौसम खुलने के बाद जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के स्नो प्वाइंट सैलानियों से गुलजार होने लगे हैं। प्रशासन ने पर्यटकों के सैर-सपाटे के लिए एक घंटे का समय अवधि और बढ़ा दी है। सैलानी अब लाहौल के दारचा तक शाम चार बजे बर्फ की वादियों को निहार सकेंगे। पहले यह समय दोपहर तीन बजे तक निर्धारित था। पिछले दिनों बर्फबारी के बाद सड़क फिसलन भरी होने से प्रशासन ने सैलानियों के घाटी प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। मौसम खुलने और तापमान बढ़ने से बर्फ पिघलने की रफ्तार तेज होते ही घाटी में सैलानियों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी है। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोग भी अब अपने ढाबों ओर होटलों को करीब दो से तीन महीने बाद फिर से खोलने लगे हैं।
देर शाम सड़क पर ब्लैक आइसिंग को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल शाम चार बजे सैलानियों को अपने गंतव्य लौटने के आदेश जारी किए हैं। उम्मीद की जा रही है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही लाहौल घाटी सैलानियों के लिए चौबीस घंटे खुल जाएगी। अटल टनल रोहतांग खुलने के बाद लाहौल घाटी में पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए आजीविका का एक बेहतर विकल्प बन कर सामने आया है। जिला पर्यटन अधिकारी और एसडीएम प्रिया नागटा ने बताया कि मौसम साफ होने के बाद लाहौल घाटी सैलानियों के लिए अब शाम चार बजे तक खोल दिया गया है। सैलानी लाहौल के दारचा तक भ्रमण कर सकते हैं, लेकिन शाम चार बजे पर्यटकों को अपने गंतव्य लौटना होगा।