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Himachal: दलाई लामा बोले- बचपन से ही छह भुजाओं वाले अवलोकितेश्वर में आस्था

Sun, 19 May 2024 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 19 May 2024 05:00 AM IST
सार

दलाई लामा ने कहा कि छह भुजाओं वाले अवलोकितेश्वर विशेष हैं। शरणार्थी के रूप में आने के बाद निरंतर रूप से उनके कार्य जारी रहे। 

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tibetan religious leader Dalai Lama said I have faith in the six-armed Avalokiteshvara since childhood
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा - फोटो : संवाद

विस्तार

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने शनिवार को मुख्य तिब्बती बुद्ध विहार मैक्लोडंगज में कालु रिंपोछे के अनुरोध पर महाकाल का आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि जब तिब्बत से भारत में शरणार्थी के रूप में आए थे, उस समय महाकाल से प्रार्थना की थी कि सत्य की जीत हो। उस समय छह भुजाओं वाले अवलोकितेश्वर मुस्कराए, ऐसा मुझे याद है। दलाई लामा ने कहा कि छह भुजाओं वाले अवलोकितेश्वर विशेष हैं। शरणार्थी के रूप में आने के बाद निरंतर रूप से उनके कार्य जारी रहे।

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आज जो लोग बुद्ध विहार आए हैं या विश्व में जो लोग जब दलाई लामा का नाम सुनते हैं तो वे मानते हैं कि अवलोकितेश्वर के कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। दलाई लामा ने कहा कि बचपन से ही 6 भुजाओं वाले अवलोकितेश्वर में श्रद्धा रखता हूं। जब भी बौद्ध चित्त या शून्यता का अभ्यास अवलोकितेश्वर की तरह करता हूं तो मैं उनको अपने करीब मानता हूं। शुरू से ही अवलोकितेश्वर का अभ्यास किया और उनकी प्रार्थना की है। मैं मानता हूं कि 6 भुजाओं वाले अवलोकितेश्वर के जो अभ्यास हैं, वह बाकी अभ्यासों से हटकर हैं।

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प्रार्थना के दौरान दलाई लामा ने 6 भुजाओं वाले अवलोकितेश्वर के चित्र का पूरा वर्णन किया और उनके हर हिस्से के बारे में वहां मौजूद अनुयायियों को बताया। दलाई लामा ने कहा कि बचपन में उनकी माता कहती थीं कि हमारे अवलोकितेश्वर- हमारे अवलोकितेश्वर, तब से वह मन के बहुत नजदीक हैं। उन्होंने कहा कि अपने और दूसरों के हित के साथ अंत के समय में भी बौद्ध चित्त का अभ्यास करना चाहिए। पाप को दूर के लिए लिए भी बौद्ध चित्त का अभ्यास जरूरी है। हर किसी व्यक्ति में यह भावना होनी चाहिए कि जब भी बौद्ध चित्त का अभ्यास करें तो उससे हर किसी जीव का हित होना चाहिए। प्रार्थना के अंत में दलाई लामा ने सभी को आशीर्वाद दिया।

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