धारा 118 की फर्जी अनुमति दिलाना पड़ा महंगा, कोर्ट ने सुनाई ये सजा
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हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रेवन्यू एक्ट की धारा 118 के तहत जाली परमिशन देना कंपनी सचिव को महंगा पड़ गया है। हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रेवन्यू एक्ट की धारा 118 के तहत जाली परमिशन देने पर कंपनी सचिव को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कपिल शर्मा की अदालत ने कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है।
अदालत ने प्रदीप कुमार तुली निवासी गांव बनयाल कॉटेज, ऑफिसर कालोनी सोलन को भादंसं 420, 467 और 468 के तहत दोषी माना है। साथ ही 3-3 साल की सजा और एक हजार रुपये जुर्माने लगाया है।
ये है पूरा मामला
उपजिला न्यायवादी नालागढ़ संदीप शर्मा ने बताया कि वर्ष 2005-06 में मैसर्ज एसएसएफ प्लास्टिक कंपनी एचपी और मैसर्ज एसएसएफ प्लास्टिक इंडिया के मालिक सुनील धवन और कपिल धवन ने औद्योगीकरण के दौरान जमीन खरीदने को हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रेवन्यू एक्ट की धारा
118 के तहत सरकार से जीपीए परमिशन लेने के बारे में अपने चंडीगढ़ स्थित कंस्लटेंट को अधिकृत किया था। उपरोक्त कंपनी का कंसलटेंट और जीपीए होते हुए धारा 118 की परमिशन लेने के लिए कंपनी सचिव प्रदीप कुमार तुली को ऑथराइजेशन दी।
इस पर तुली ने सरकार से जाली परमिशन ही लाकर दे दी। इन कंपनियों के अलावा दोषी ने मैसर्ज चांदला पैकेजिंग, मैसर्ज मोलेलिज सोप एंड डिटरजेंट, मैसर्ज स्टायलो, मैसर्ज पाइन ट्री पैकेजिंग आदि अन्य कई कंपनियों को भी परमिशन लाकर दी थी, वह जांच में जाली पाई गई।
अदालत ने गवाहों के बयान, दस्तावेजों व साइंटिफिक एविडेंस के आधार पर दोषी प्रदीप कुमार तुली को धारा 420 के तहत 3 साल, धारा 467 के तहत 3 साल व और धारा 468 के तहत 1000 रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। मामले की तफ्तीश तत्कालीन बरोटीवाला के थाना प्रभारी गुरदयाल सिंह ने की थी।