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Shimla News: एचपीयू के तीन वैज्ञानिक विश्व की दो फीसदी सूची में शामिल
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प्रो. एसएस कंवर, रीना और डॉ. रवि कांत शामिल
वैज्ञानिक शोध, शोधपत्रों के प्रकाशन पर मिला सम्मान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तीन संकाय सदस्यों को विश्व के शीर्ष दो फीसदी वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है। इनमें प्रो. एसएस कंवर, प्रो. रीना गुप्ता और डॉ. रवि कांत भाटिया शामिल हैं। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से संबद्ध इस सूची में तीनों वैज्ञानिकों को लगातार दूसरे वर्ष स्थान मिला है।
यह उपलब्धि वैज्ञानिक शोध, शोधपत्रों के प्रकाशन और अकादमिक क्षेत्र में उनके योगदान को दर्शाती है। तीनों संकाय सदस्यों की इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. दूनीचंद और जीवन विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. वामिक आजमी ने तीनों वैज्ञानिकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने उनके शोध कार्यों और वैज्ञानिक क्षेत्र में योगदान की सराहना की। विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के लिए यह उपलब्धि महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लगातार दूसरे वर्ष तीनों संकाय सदस्यों का सूची में शामिल होना उनके शोध कार्यों में निरंतरता को दर्शाता है।
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वैज्ञानिक शोध, शोधपत्रों के प्रकाशन पर मिला सम्मान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तीन संकाय सदस्यों को विश्व के शीर्ष दो फीसदी वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है। इनमें प्रो. एसएस कंवर, प्रो. रीना गुप्ता और डॉ. रवि कांत भाटिया शामिल हैं। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से संबद्ध इस सूची में तीनों वैज्ञानिकों को लगातार दूसरे वर्ष स्थान मिला है।
यह उपलब्धि वैज्ञानिक शोध, शोधपत्रों के प्रकाशन और अकादमिक क्षेत्र में उनके योगदान को दर्शाती है। तीनों संकाय सदस्यों की इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. दूनीचंद और जीवन विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. वामिक आजमी ने तीनों वैज्ञानिकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने उनके शोध कार्यों और वैज्ञानिक क्षेत्र में योगदान की सराहना की। विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के लिए यह उपलब्धि महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लगातार दूसरे वर्ष तीनों संकाय सदस्यों का सूची में शामिल होना उनके शोध कार्यों में निरंतरता को दर्शाता है।
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