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Shimla News: चिट्टे के मामले में तीन आरोपी अदालत से बरी
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गवाही में विरोधाभास का मिला लाभ
42 ग्राम चिट्टे के साथ पकड़ने का किया था दावा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने एनडीपीएस के एक मामले में कोटखाई के तीन युवकों के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं होने पर उन्हें बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश (वन) अजय मेहता की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
अदालत के मुताबिक तीन पुलिस कर्मियों की गवाही विरोधाभासों और विसंगतियों से भरी हुई है। साक्ष्य को पुष्ट, विश्वसनीय और भरोसेमंद नहीं माना जा सकता है। स्वतंत्र गवाह की भी जांच की गई है, जो अविश्वसनीय प्रकृति का है। इस प्रकार रिकॉर्ड पर कोई पुष्ट, विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं है, जो उचित संदेह से परे साबित कर सके कि कथित प्रतिबंधित पदार्थ आरोपी व्यक्तियों के वाहन से बरामद किया था।
मामला जिले के देहा पुलिस थाना क्षेत्र में 26 अक्तूबर 2022 में पंजीकृत किया था। शाम करीब 5 बजे पुलिस की एक टीम विधानसभा चुनाव के संबंध में यातायात जांच के लिए सैंज क्षेत्र में गश्त पर थी और कदरूण में नाका लगाया था। इसी दौरान नेरी पुल की ओर से आ रही एक कार को जांच के लिए रोका। आरोप के मुताबिक वाहन की पिछली सीट पर बैठा विशाल दरवाजा खोलकर अंधेरे का लाभ उठाकर झाड़ियों की ओर भाग गया। कार को पंकज चला रहा था, जबकि साथ वाली सीट पर अंकित बैठा था। संदेह के आधार पर पुलिस ने वाहन के डैशबोर्ड, सीटों की जेबों तथा डिक्की की जांच की। पुलिस ने दावा किया था कि इस दौरान कार से 42 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। इसके बाद आरोपियों को देहा थाना पुलिस के हवाले किया गया था। आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में 8 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। लेकिन पर्याप्त सबूत न होने के कारण अदालत ने आरोपियों को एनडीपीएस अधिनियम, की धारा 21, 25, 29 के तहत दंडनीय कथित अपराध के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियुक्तों के विरुद्ध लगाए गए अपराध को उचित संदेहों से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। संवाद
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42 ग्राम चिट्टे के साथ पकड़ने का किया था दावा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने एनडीपीएस के एक मामले में कोटखाई के तीन युवकों के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं होने पर उन्हें बरी कर दिया। विशेष न्यायाधीश (वन) अजय मेहता की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
अदालत के मुताबिक तीन पुलिस कर्मियों की गवाही विरोधाभासों और विसंगतियों से भरी हुई है। साक्ष्य को पुष्ट, विश्वसनीय और भरोसेमंद नहीं माना जा सकता है। स्वतंत्र गवाह की भी जांच की गई है, जो अविश्वसनीय प्रकृति का है। इस प्रकार रिकॉर्ड पर कोई पुष्ट, विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं है, जो उचित संदेह से परे साबित कर सके कि कथित प्रतिबंधित पदार्थ आरोपी व्यक्तियों के वाहन से बरामद किया था।
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मामला जिले के देहा पुलिस थाना क्षेत्र में 26 अक्तूबर 2022 में पंजीकृत किया था। शाम करीब 5 बजे पुलिस की एक टीम विधानसभा चुनाव के संबंध में यातायात जांच के लिए सैंज क्षेत्र में गश्त पर थी और कदरूण में नाका लगाया था। इसी दौरान नेरी पुल की ओर से आ रही एक कार को जांच के लिए रोका। आरोप के मुताबिक वाहन की पिछली सीट पर बैठा विशाल दरवाजा खोलकर अंधेरे का लाभ उठाकर झाड़ियों की ओर भाग गया। कार को पंकज चला रहा था, जबकि साथ वाली सीट पर अंकित बैठा था। संदेह के आधार पर पुलिस ने वाहन के डैशबोर्ड, सीटों की जेबों तथा डिक्की की जांच की। पुलिस ने दावा किया था कि इस दौरान कार से 42 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। इसके बाद आरोपियों को देहा थाना पुलिस के हवाले किया गया था। आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में 8 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। लेकिन पर्याप्त सबूत न होने के कारण अदालत ने आरोपियों को एनडीपीएस अधिनियम, की धारा 21, 25, 29 के तहत दंडनीय कथित अपराध के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियुक्तों के विरुद्ध लगाए गए अपराध को उचित संदेहों से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। संवाद
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