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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   This devta of Kullu hates drugs, prohibition of carrying bidi cigarettes and tobacco in the village

Himachal: हिमाचल के इस देवता को नशे से है नफरत, गांव में बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू ले जाना निषेध

Fri, 07 Oct 2022 03:46 PM IST
Krishan Singh राजीव नैय्यर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
राजीव नैय्यर, संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू Published by: Krishan Singh Updated Fri, 07 Oct 2022 03:46 PM IST
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सार
 हिमाचल प्रदेश की देवभूमि कुल्लू में देवता भी नशे के खिलाफ हैं। देवता के पुजारी ने कहा कि देवता को नशे से नफरत है।
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This devta of Kullu hates drugs, prohibition of carrying bidi cigarettes and tobacco in the village
लगघाटी के फलाणी नारायण देवता। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की देवभूमि कुल्लू में देवता भी नशे के खिलाफ हैं। लगघाटी के फलाणी नारायण ऐसे देवता हैं, जिन्हें नशे से नफरत है। देवता के मुख्य देवस्थल गांव डुपकन में घर के भीतर बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू ले जाना निषेध है। इसके अलावा देवता के अधिकतर हारियान क्षेत्र में भी यही नियम लागू होते हैं। वहीं, शराब पर भी देवता ने अपने देवलुओं पर पाबंदी लगाई है। देव कारज में कोई भी देवलु नशा नहीं करेगा। इससे देव परंपरा का भी बेहतर निर्वहन होगा और किसी तरह का देव कारज में खलल भी नहीं पड़ेगा। बता दें कि लगघाटी के गांव डुपकन के देवता फलाणी नारायण अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव की परंपरा निभाने कुल्लू पहुंचे हैं। दशहरा में देवता का अस्थायी शिविर जिला पुस्तकालय कुल्लू के समीप है। देवता साल 2001 से दशहरा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। 



देवता के पुजारी कृपा राम ठाकुर ने कहा कि देवता को नशे से नफरत है। पौराणिक मान्यता है कि देवता के पीछे भैरों नाथ पड़े थे। देवता फलाणी नारायण भंवरे का रूप धारण कर तंबाकू के फूल में छुप जाते हैं और तंबाकू के पौधे से कहते हैैं कि भैरों नाथ को बताना मत की मैं यहां छुपा हूं, लेकिन तंबाकू का पौधा बता देता है कि देवता उसके फूल में छिपे हैं। इसी मान्यता के अनुसार देवता को नशे से पूर्ण नफरत है और देवता के मूल स्थान में नशे पर पूर्ण प्रतिबंध है। उन्होंने कहा कि देवता के दो मुख्य पर्व हैं, जो श्रावण और फाल्गुन मास में मनाए जाते हैं। श्रावण में श्रावणी और फाल्गुन में फागली मेला मनाया जाता है।  


देवलोक में तब्दील हुआ ढालपुर मैदान अस्थायी शिविरों में विराजमान हुए देवी-देवता
दशहरा उत्सव के लिए आए सैकड़ों देवी-देवता अब अपने अस्थायी शिविरों में विराजमान हो गए हैं। देवी-देवताओं की उपस्थिति से अब ढालपुर का मैदान देवलोक में तब्दील हो गया है। देवी-देवताओं की सुबह के समय ढोल नगाड़ों के साथ पूजा-अर्चना की गई। वहीं, देवताओं के दर्शनों के लिए अस्थायी शिविरों में श्रद्धालुओं का तांता लग गया है। श्रद्धालु दूर-दूर से देवता के दर्शनों के लिए अस्थायी शिविरों में आ रहे हैं। भगवान रघुनाथ के पास शीश नवाने के लिए वीरवार को भी कुछ देवता पहुंचे। इसके साथ ही यहां पर दिनभर भगवान रघुनाथ के दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ी रही।

देवता बिजली महादेव, माता हिडिंबा सहित अन्य देवताओं के शिविरों में खासी चहल पहल रही। दशहरा उत्सव में इस बार 300 से अधिक देवता पहुंचे हैं। दशहरा मैदान में देवी-देवताओं के देवरथ दशहरा की शोभा को चार चांद लगा रहे हैं। गौर रहे कि देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में ठीक वैसे ही पूजा अर्चना की जा रही है। जैसे देवालयों में की जाती है। सैकड़ों किलोमीटर दूर से देवता के साथ आए हुए देवलु भी देवताओं के साथ डेरा जमाए हुए हैं। देवलु ललित कुमार, पवन ठाकुर और मोहित ने कहा कि दशहरा ही एक ऐसा मौका है, जहां पर एक साथ पूरे जिले के देवता एक साथ देखने को मिलते हैं। ऐसे में देवताओं की उपस्थिति से यह ढालपुर मैदान देवलोक में बदल जाता है। जिला देवी देवता कारदार संघ के महासचिव टीसी महंत ने कहा कि दशहरा में ढालपुर का मैदान में देवताओं के दर्शनों का श्रद्धालुुओं को सौभाग्य मिल रहा है। देवताओं के अस्थायी शिविरों में सुबह और शाम को विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। 

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