विज्ञान-प्रौद्योगिकी से ग्रामीण जीवन में उत्थान पर वैज्ञानिक करेंगे विमर्श
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी कमांद में तीसरी हिमाचल प्रदेश विज्ञान कांग्रेस का शुभारंभ हो गया। दो दिवसीय इस कार्यक्रम का आयोजन हिमाचल प्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद हिमकोस्ट की ओर से किया जा रहा है।
कांग्रेस के पहले दिन गांवों के लिए इनोवेशन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रयासों से गांवों का उत्थान थीम पर आयोजित सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने विचार रखे।
उद्घाटन अवसर पर डॉ. संघमित्रा बंदोपाध्याय निदेशक भारतीय सांख्यिकी संस्थान ने माइक्रो आरएनए पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने गंभीर बीमारियों के उपचार में कंप्यूटेशनल बायोलॉजी की अहमियत बताई। उन्होंने जीव विज्ञान की बेहतर समझ के लिए मशीन लर्निंग की जरूरत बताई।
कुणाल सत्यार्थी आईएफएसए सदस्य सचिव हिमकोस्ट ने कहा कि ग्रामीण जीवन में बदलाव के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का लाभ पहुंचाना होगा। हिमाचल के 5 जिलों में शुरू की गई विज्ञान ग्राम स्कीम पर उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और उपस्थित वैज्ञानिकों को ग्रामीण जीवन उत्थान में योगदान देना होगा।
इस अवसर पर उपायुक्त मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने कहा कि वैज्ञानिकों को पिछड़े क्षेत्रों पर आधारित परियोजनाओं पर शोध करना चाहिए। मंच पर उपस्थित अतिथियों ने हिमाचल प्रदेश साइंस कांग्रेस के लिए प्राप्त 337 एब्सट्रैक्ट की एक स्मारिका भी जारी की।
आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. टिमथी गोन्जाल्विस ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि साइंस कांग्रेस में उद्योग जगत के लिए पैनल डिस्कशन होगा, जिसमें ग्रामीण आबादी तक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का लाभ पहुुंचाने पर विचार विमर्श किया जाएगा।
इस अवसर पर उप कुलपति गोविंद पंत कृृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उत्तराखंड ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर बल दिया। सम्मेलन में प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के विश्व विद्यालयों से लगभग 600 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इसमें 31 प्रदर्शनियां भी लगाई गई हैं।