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Shimla News: टोकन सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं, आवाज दे बुलाए जा रहे हैं मरीज
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आईजीएमसी में आधा-अधूरा चल रहा टोकन सिस्टम, नेत्र रोग विभाग में पर्ची बनवाने के बाद दरवाजे को ताकते रहते हैं मरीज
सुरक्षा कर्मी आवाज देकर मरीजों को भेजता है डॉक्टरों के पास
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईएमसी) के न्यू ओपीडी ब्लॉक में मरीजों के लिए कंप्यूटर और आभा आईडी के माध्यम से पर्ची बनवाने की व्यवस्था लागू कर दी है लेकिन टोकन नंबर सिस्टम पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है।
टोकन के मुताबिक चिकित्सकों को दिखाने की व्यवस्था पूरी तरह से सभी ओपीडी में काम नहीं कर रही है। मरीज ओपीडी के बाहर बैठकर दरवाजे को ताकते रहते हैं कि उनकी बारी आई या नहीं। वहीं कुछ ओपीडी में अभी भी ऑनलाइन पर्ची की फीस जमा नहीं हो रही है और टोकन नंबर स्क्रीन पर डिस्पले नहीं हो रहे हैं। इन ओपीडी में अभी भी आवाज लगाकर मरीजों को बुलाने का क्रम जारी है। अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में भी आवाज देकर मरीजों को बुलाया जाता है। ओपीडी में बने काउंटर पर पहले पर्ची बनवाकर कैश का भुगतान करना पड़ता है। रोगी कल्याण समिति का लगाया कोड स्कैन कर पर्ची की फीस जमा नहीं हो रही है।
साधारण कंप्यूटर के माध्यम से बनाई जा रही पर्ची पर सिर्फ आभा आईडी से बन रही पर्ची के अलावा अन्य पर्चियों पर कोई टोकन नंबर नहीं मिलता। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मी पहले कतार में खड़े मरीजों की पर्चियों को एकत्र करता है और फिर आवाज लगाकर चिकित्सक के पास भेजता है। विभाग में ओपीडी में दिखाने की व्यवस्था में सुधार कर लागू किए टोकन सिस्टम का मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल रहा था। मनोरोग विभाग में भी टोकन नंबर सिस्टम नहीं है।
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मेडिसिन और सर्जरी विभाग की ओपीडी में टोकन नंबर स्क्रीन पर डिस्प्ले हो रहे थे लेकिन यहां भी पर्चियों को एकत्र कर बारी-बारी मरीजों को बुलाया जा रहा था। यहां भी टोकन नंबर पूरी तरह से काम नहीं कर रहा था। अस्पताल के एमएस डाॅ. राहुल राव ने कहा कि टोकन नंबर सिस्टम सभी ओपीडी में लागू कर दिया है। आभा आईडी के माध्यम से पर्ची बनाने की प्रक्रिया को सरल किया है। पर्ची बनवाने के लिए पर्ची काउंटर के अलावा हर ओपीडी में भी सुविधा दी गई है।
दस रुपये देकर बनवाई पर्ची, अब बारी का इंतजार
नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में दिखाने को आए संजीव कुमार ने बताया कि उसे कोई टोकन नंबर जारी नहीं हुआ है। काउंटर पर दस रुपये की फीस लेकर पर्ची बनाकर दी है, अब पर्ची ओपीडी में जमा करवाकर अपनी बारी के आने का इंतजार कर रहा हूं। अस्पताल के सर्जरी विभाग में भर्ती मरीज विजय कुमार के परिजनों ने बताया कि व्हील चेयर पर मरीज को लेकर आए हैं, यहां टोकन सिस्टम की कोई सुविधा नहीं है। पहले चिकित्सक को दिखाने के लिए कतार में खड़े रहे, अब आखों को मशीन पर चेक करवाने के लिए लाइन में लगे हैं। दीक्षिता ने कहा कि उन्हें कोई टोकन नंबर नहीं मिला है, सुबह ऑनलाइन आभा कार्ड से पर्ची नहीं बनी। बताया गया कि सिस्टम में कुछ तकनीकी दिक्कत आई है।
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सुरक्षा कर्मी आवाज देकर मरीजों को भेजता है डॉक्टरों के पास
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईएमसी) के न्यू ओपीडी ब्लॉक में मरीजों के लिए कंप्यूटर और आभा आईडी के माध्यम से पर्ची बनवाने की व्यवस्था लागू कर दी है लेकिन टोकन नंबर सिस्टम पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है।
टोकन के मुताबिक चिकित्सकों को दिखाने की व्यवस्था पूरी तरह से सभी ओपीडी में काम नहीं कर रही है। मरीज ओपीडी के बाहर बैठकर दरवाजे को ताकते रहते हैं कि उनकी बारी आई या नहीं। वहीं कुछ ओपीडी में अभी भी ऑनलाइन पर्ची की फीस जमा नहीं हो रही है और टोकन नंबर स्क्रीन पर डिस्पले नहीं हो रहे हैं। इन ओपीडी में अभी भी आवाज लगाकर मरीजों को बुलाने का क्रम जारी है। अस्पताल के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में भी आवाज देकर मरीजों को बुलाया जाता है। ओपीडी में बने काउंटर पर पहले पर्ची बनवाकर कैश का भुगतान करना पड़ता है। रोगी कल्याण समिति का लगाया कोड स्कैन कर पर्ची की फीस जमा नहीं हो रही है।
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साधारण कंप्यूटर के माध्यम से बनाई जा रही पर्ची पर सिर्फ आभा आईडी से बन रही पर्ची के अलावा अन्य पर्चियों पर कोई टोकन नंबर नहीं मिलता। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मी पहले कतार में खड़े मरीजों की पर्चियों को एकत्र करता है और फिर आवाज लगाकर चिकित्सक के पास भेजता है। विभाग में ओपीडी में दिखाने की व्यवस्था में सुधार कर लागू किए टोकन सिस्टम का मरीजों को कोई लाभ नहीं मिल रहा था। मनोरोग विभाग में भी टोकन नंबर सिस्टम नहीं है।
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मेडिसिन और सर्जरी विभाग की ओपीडी में टोकन नंबर स्क्रीन पर डिस्प्ले हो रहे थे लेकिन यहां भी पर्चियों को एकत्र कर बारी-बारी मरीजों को बुलाया जा रहा था। यहां भी टोकन नंबर पूरी तरह से काम नहीं कर रहा था। अस्पताल के एमएस डाॅ. राहुल राव ने कहा कि टोकन नंबर सिस्टम सभी ओपीडी में लागू कर दिया है। आभा आईडी के माध्यम से पर्ची बनाने की प्रक्रिया को सरल किया है। पर्ची बनवाने के लिए पर्ची काउंटर के अलावा हर ओपीडी में भी सुविधा दी गई है।
दस रुपये देकर बनवाई पर्ची, अब बारी का इंतजार
नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में दिखाने को आए संजीव कुमार ने बताया कि उसे कोई टोकन नंबर जारी नहीं हुआ है। काउंटर पर दस रुपये की फीस लेकर पर्ची बनाकर दी है, अब पर्ची ओपीडी में जमा करवाकर अपनी बारी के आने का इंतजार कर रहा हूं। अस्पताल के सर्जरी विभाग में भर्ती मरीज विजय कुमार के परिजनों ने बताया कि व्हील चेयर पर मरीज को लेकर आए हैं, यहां टोकन सिस्टम की कोई सुविधा नहीं है। पहले चिकित्सक को दिखाने के लिए कतार में खड़े रहे, अब आखों को मशीन पर चेक करवाने के लिए लाइन में लगे हैं। दीक्षिता ने कहा कि उन्हें कोई टोकन नंबर नहीं मिला है, सुबह ऑनलाइन आभा कार्ड से पर्ची नहीं बनी। बताया गया कि सिस्टम में कुछ तकनीकी दिक्कत आई है।