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Shimla News: पेट बाहर निकाला, साढ़े छह घंटे सर्जरी, मरीज अब स्वस्थ

Wed, 11 Feb 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Feb 2026 11:59 PM IST
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The stomach was removed, and the patient underwent a six-and-a-half-hour surgery.
आईजीएमसी के सर्जरी विभाग ने लेप्रोस्कोपिक तकनीक से की जटिल सर्जरी, कैंसर मरीज महिला को दी राहत
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सर्जरी यूनिट दो के डॉ. वेद शर्मा की अगुवाई में हुआ ऑपरेशन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) के सर्जरी विभाग ने पेट के कैंसर से पीड़ित एक 44 साल की महिला मरीज का लेप्रोस्कोपी से सफल ऑपरेशन किया है। आईजीएमसी प्रबंधन का दावा है कि उत्तरी भारत के सरकारी अस्पतालों में यह पहला मामला है।

सर्जरी में पेट के 90 फीसदी हिस्से को बाहर निकाल कर इसे कैंसर मुक्त बनाकर फिर से जोड़ना एक जटिल प्रक्रिया थी। दो फरवरी को इस महिला मरीज की साढ़े छह घंटे तक सर्जरी चली। इसके बाद अब मरीज ठीक है, उसे जल्द अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। सर्जरी यूनिट दो के डॉ. वेद शर्मा की अगुवाई में डाॅ. विपिन शर्मा, डाॅ. शुभम, डॉ. आशीष और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मनोज की टीम ने इस जटिल सर्जरी को पूरा किया। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव और सर्जरी विभाग के सर्जन डाॅ. वेद शर्मा तथा उनकी टीम ने पत्रकारों से बात करते हुए इस उपलब्धि के बारे में बताया।
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डॉ. वेद शर्मा ने बताया कि कई दशकों से आईजीएमसी में लेप्रोस्कोपिक से पेट की सर्जरी की जाती रही है, लेकिन यह सबसे लंबी और जटिल सर्जरी थी। इसकी सुविधा अभी तक उत्तरी भारत के कुछ निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध है। साढ़े छह घंटे की इस सर्जरी में आम ऑपरेशन से दो घंटे से अधिक समय लगा। लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन से लाभ यह हुआ कि मरीज जल्द रिकवर हो गई और जल्द ही अस्पताल से उसे छुट्टी दी जा रही है।
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वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने कहा कि अस्पताल में अब पुरानी मशीनों को बदलने और नई तकनीकों को अपनाकर स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार कार्य किया जा रहा है।



आज भी होंगे दो मरीजों को ऑपरेशन
सर्जरी के सफल रहने के बाद अब वीरवार को भी दो लेप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन रखे हैं। इसमें भी सर्जरी लंबी चलेगी और जटिल होगी। इस सर्जरी में करीब 1.60 लाख रुपये खर्च आया है निजी अस्पताल में यह खर्च चार लाख तक रहता है। आम सर्जरी में मरीज को दो से तीन सप्ताह तक अस्पताल में रखना पड़ता है, लेकिन इसमें एक सप्ताह में मरीज ठीक हो जाता है। लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन में हल्का चीरा लगाकर सर्जरी की जाती है।
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