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Himachal: बेसहारा पशुओं की दुर्दशा पर प्रदेश हाईकोर्ट ने लिया कड़ा संज्ञान, दिए ये आदेश

Wed, 04 Dec 2024 10:14 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 04 Dec 2024 10:14 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में बेसहारा पशुओं की दुर्दशा पर कड़ा संज्ञान लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई की।

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The state High Court took strict cognizance of the plight of destitute animals
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में बेसहारा पशुओं की दुर्दशा पर कड़ा संज्ञान लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि बजट में 50 करोड़ का प्रावधान किया है। इसके बावजूद पशुओं की दुर्दशा में सुधार नहीं हुआ है। कांगड़ा की लुथान गो सेंक्चुरी पर जनहित याचिका की पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि यहां पर पशुओं को ठूंस-ठूंस कर भरा है।

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यहां सिर्फ सूखा चारा दिया जाता है। अधिवक्ता ने जब इस सेंक्चुरी का दौरा किया तो पाया कि खुले में मरे हुए पशुओं के कंकाल फेंके गए हैं। उन्होंने बताया कि गोसदन के नाम से करोड़ों के बजट का प्रावधान है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में सरकार ने शराब की हर एक बोतल पर 10 रुपये गोशुल्क वसूलने का प्रावधान था। इसके बावजूद यह पैसा कहां खर्च किया जा रहा है। इसके बारे में कुछ भी लेखा-जोखा नहीं है। उन्होंने बताया कि इस मामले में करोड़ों के घोटाले होने की संभावना जताई जा रही है।

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