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किरतपुर-नेरचौक फोरलेन का बंद काम जल्द शुरू होगा, गठित होगी कमेटी

Wed, 12 Dec 2018 08:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,धर्मशाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,धर्मशाला Updated Wed, 12 Dec 2018 08:21 PM IST
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The shutdown work of Kiratpur Ner Chowk Four Lane will start soon in himachal

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि किरतपुर-नेरचौक फोरलेन सड़क परियोजना का बंद पड़ा कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा। उन्होंने यह मामला केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मामला उठाया है। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी सत्र के तीसरे दिन झंडूता के विधायक जेआर कटवाल द्वारा नियम 62 के तहत लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जबाव में दी।  

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उन्होंने कहा कि किरतपुर-नैरचौक फोरलेन सड़क का काम बीओटी के आधार पर किरतपुर-नेरचौक एक्सप्रेस वे लिमिटेड को 14 नवंबर 2013 को एनएचएआई की ओर से दिया गया था। इसको तीन वर्ष की अवधि में 12 नवंबर 2016 तक पूरा किया जाना था। लेकिन, ठेकेदार की वित्तीय स्थिति अच्छी न होने के चलते यह कार्य पूरा नहीं हो सका।
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ठेकेदार को नोटिस भी भेजा गया था, लेकिन आर्थिक मजबूरी के चलते उसने कार्य करने में असमर्थ जाहिर की और काम बंद हो गया। भारतीय राष्ट्रीय राज्य मार्ग प्राधिकरण (एनएचआईए) और सड़क परिवहन तथा राजमार्ग मंत्रालय द्वारा सक्रिय रूप से काम को शुरू करने और समय पर पूरा करने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं। काम शुरू होने पर ठेकेदारों द्वारा साइट आवश्यकता के अनुसार प्रोटेक्शन वर्क को किया जाएगा।

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हिमाचल में चल रहे फोरलेन के कार्य को गंभीरता से लेगी सरकार

The shutdown work of Kiratpur Ner Chowk Four Lane will start soon in himachal

नई कंपनी को काम दिए जाने की बात चल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह चाहते हैं कि केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिकारियों को निर्देश दें कि हिमाचल में चल रहे फोरलेन के प्रत्येक कार्य पैकेज के संबंध में ढलान संरक्षण व पर्याप्त परिवहन यातायात संकेत स्थापित करने और स्थिरीकरण के कार्यान्वयन के लिए कार्य योजना बनाकर हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ साझा करे। इसके बाद राज्य सरकार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित करेगी जो हिमाचल में चल रहे फोरलेन के प्रत्येक कार्य पैकेज की निगरानी करेगी, जिससे आम जनता को दिन और रात में सुरक्षित सड़कें व सुचारू यातायात प्रदान किया जा सकें।

उन्होंने कहा कि सरकार हिमाचल में चल रहे फोरलेन के कार्य को गंभीरता से लेगी। लोगों की संपत्ति की सुरक्षा में समझौता सहन नहीं करेगी ताकि सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूर्ण किए जा सके और आम जनता को किसी तरह की असुविधा न हो। मुख्यमंत्री ने विधायक कटवाल द्वारा लाए गए इस मामले पर उन्हें आश्वस्त किया कि उनके विधानसभा क्षेत्र के फोरलेन प्रभावितों की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी जिसमें डीसी बिलासपुर कमेटी के अध्यक्ष होंगे जबकि एनएचएआई के  अधिकारी और सरकार तथा स्टेट हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी भी इसके सदस्य होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कमेटी प्रभावित परिवारों की समस्याएं सुनेंगी तथा उनके हल के लिए हर तरह की कार्रवाई करेगी। इससे पूर्व विधायक जेआर कटवाल द्वारा नियम 62 के तहत कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के निर्माण से उनके विधानसभा क्षेत्र की जनता को आ रही परेशानियों और हुए नुकसान का मामला सदन में लाया। जिन क्षेत्रों से यह फोरलेन गुजर रहा है वहां की जतना के घरों सहित अन्य सम्पति और पेयजल स्रोतों को भी नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई की जानी चाहिए ताकि उनकी परेशानियां कम हो सकें।

गोबिंदसागर में कम, पौंग डैम में बढ़ा मछली उत्पादन

The shutdown work of Kiratpur Ner Chowk Four Lane will start soon in himachal

गोबिंदसागर झील में पिछले तीन सालों में मत्स्य उत्पादन में कमी है, जबकि पौंग बांध में इसमें बढ़ोतरी हुई है। तीन साल के मुकाबले में गोबिंदसागर झील में करीब 50 फीसदी उत्पादन में कमी आई है।

बिलासपुर के विधायक सुभाष कुमार के प्रश्न के लिखित जवाब में ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि गोबिंदसागर झील में साल 2015-16 में 858.782 मीट्रिक टन, वर्ष 2016-17 में 753.537 और वर्ष 2017-18 में 471.797 मीट्रिक ट्रन मछली उत्पादन हुआ है, जबकि पौंग बांध में वर्ष

2015-16 में 415.423, 2016-17 में 381.910 और वर्ष 2017-18 में 413.315 मीट्रिक टन मछली उत्पादन हुआ है। गोबिंदसागर से मछली उत्पादन के रूप में साल 2015-16 में 86.41 लाख, 2016-17 में 79.26 और साल 2017-18 में 54.79 लाख रुपये आय हुई।

इसके अलावा पौंग डैम में 2015-16 में 105.81 लाख, 2016-17 में 92.77 लाख और साल 2017-18 में 110.23 लाख रुपये की आमदनी हुई। साल 2015-16 में गोबिंदसागर में 134.089, 2016-17 में 174.850 और साल 2017-18 में 88.507 लाख मछली बीज डाला गया।

साल 2017 में उत्पादन बढ़ाने के लिए संग्रहण किए गए मछली बीज का साइज 25-40 एमएम के स्थान पर 70 एमएम या इससे अधिक कर दिया गया है। केंद्रीय अंतरस्थलीय मात्स्यिकी संस्थान बैरकपुर पश्चिम बंगाल की सहायता से सरकार

गोबिंद सागर में कम हो रहे मछली उत्पादन का वैज्ञानिक अध्ययन करवाएगी। इस साल बंद सीजन को 15 दिन बढ़ाया गया। इसके चलते बंद सीजन खुलने पर अधिकतर मछलियां प्राकृतिक प्रजनन करने में सफल रही। 

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