प्राथमिक संपर्क को कानूनी रूप से कोरोना टेस्ट के लिए किया जाएगा बाध्य
हिमाचल के ऊना जिले में कोरोना संक्रमण का कहर लगातार जारी है। रोजाना औसतन आधा दर्जन कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कांटेक्ट ट्रेसिंग के अनुसार कोरोना टेस्ट नहीं हो रहे हैं। इस पर अब ऊना जिला प्रशासन सख्त तरीके से निपटने जा रहा है। प्राथमिक संपर्क को कानूनी रूप से कोरोना टेस्ट करवाने के लिए बाध्य किया जाएगा। उपायुक्त ऊना राघव शर्मा इसके लिए योजना तैयार कर रहे हैं। ऊना में डीसी का पदभार संभालने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने उनके ध्यान में प्राथमिक संपर्क में सामने आ रहे कुछ लोगों द्वारा सैंपल के लिए इंकार करने का मामला ध्यान में लाया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए कांटेक्ट ट्रेसिंग में सामने आने वाले हर व्यक्ति को कानूनी रूप से कोरोना टेस्ट करवाने के लिए बाध्य किया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि इस तरह आम जनता को किसी भी सूरत में खतरे में नहीं डाला जा सकता है। ऐसे में लापरवाह लोगों पर शिकंजा कसने के लिए कानूनी तौर पर जुर्माने या अन्य कार्रवाई का प्रावधान किया जा सकता है। उधर, स्वास्थ्य विभाग की मानें तो किसी भी व्यक्ति के कोरोना संक्रमित आने के बाद कांटेक्ट ट्रेसिंग की जा रही है, लेकिन कुछ मामलों में लोग लक्षण न होने का हवाला देकर सैंपल देने से इंकार कर रहे हैं। जबकि, इनका सैंपल लेकर जांच करना जरूरी है ताकि कोरोना संक्रमण न फैले। इसी तरह कुछ मामलों में लोग लक्षण आने पर भी कोरोना टेस्ट नहीं करवा रहे हैं। बाद में जब गंभीर रूप से बीमार पड़ने देरी से अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे मामलों में दिक्कतें पेश आ रही हैं।
कुछ लोग सैंपल देने से कर रहे मना: सीएमओ
सीएमओ डॉक्टर रमन कुमार शर्मा ने बताया कि कुछ मामलों में लोग कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल देने से इंकार कर रहे हैं। जिससे दिक्कतें पेश आ रही है। इस तरह कोरोना की चेन न टूटने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने वाले व्यक्ति का कोरोना टेस्ट जरूरी है।
कानूनी रूप से जिम्मेदारी की जाएगी तय:उपायुक्त
उपायुक्त राघव शर्मा ने कहा कि यह मामला ध्यान में आया है। कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल न देने वाले व्यक्ति की कानूनी रूप से जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि किसी भी सूरत पर लापरवाही सहन नहीं की जाएगी।