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Shimla News: नए साल से पहले नगर निगम सभी व्यावसायिक परिसर किराये पर देगा

Tue, 27 Oct 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2026 11:59 PM IST
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The Municipal Corporation will lease out all commercial premises before the New Year.
खास खबर
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केंद्रीय अनुदान न मिलने से आर्थिक तंगी झेल रहे नगर निगम शिमला ने लिया बड़ा फैसला, सभी परिसरों की सूची तैयार
शहर में अपनी खाली जमीनों को लीज पर देने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। केंद्र सरकार से अनुदान न मिलने के कारण आर्थिक संकट झेल रहे नगर निगम ने शहर में खाली पड़े अपने सभी व्यावसायिक परिसर नए साल से पहले किराये पर देने का फैसला लिया है। इसके लिए इनका रिकॉर्ड तैयार कर लिया है। टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

नवंबर के अंत तक निगम को इन व्यावसायिक परिसरों से एक करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा मिलने की उम्मीद है। व्यावसायिक परिसरों के बाद नगर निगम शहर में अपनी खाली पड़ी जमीन भी लीज पर देने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए कई टैक्सी यूनियनों के साथ बात चल रही है। नगर निगम के अनुसार शिमला शहर में संजौली के नवनिर्मित परिसर, आजीविका भवन, लक्कड़ बाजार, छोटा शिमला, विकासनगर, टुटीकंडी, ऑकलैंड, कनलोग, ढली में खाली पड़े व्यावसायिक परिसरों की दुकानें किराये पर दी जा रही हैं। यह सभी दुकानें 11 महीने की लीज पर दी जाएंगी। शहर में जिन लोगों के पास पहले से नगर निगम की संपत्तियां किराये पर हैं, वह इस बार आवेदन नहीं कर पाएंगे। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि शहर में जो भी दुकानें खाली हैं या नई तैयार हुई हैं, उन्हें नगर निगम किराये पर देने जा रहा है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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पहली बार लागू होगा रोस्टर, डिफाल्टर बाहर
शहर में पहली बार दुकानों को किराये पर देने के लिए नगर निगम रोस्टर सिस्टम लागू करने जा रहा है। शहर में किस दुकान के लिए कौन आवेदन कर सकता है, इसे टेंडर में शामिल कर लिया है। साल 2001 में सरकार के बनाए रोस्टर को ही नगर निगम अपनाने जा रहा है। निगम ने अपना रोस्टर भी तैयार किया था जिसे अब रद कर दिया है। सरकार ने 2001 में सभी वर्गों के लिए रोस्टर तैयार किया था। इसे निगम ने आज तक लागू नहीं किया। अब इसे लागू किया जा रहा है। इसके अलावा जो लोग निगम के बिल भुगतान, लीज राशि देने आदि को लेकर पहले से डिफाल्टर हैं, उन्हें दुकानें नहीं मिलेंगी।
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केंद्रीय अनुदान में भारी कटौती
नगर निगम के अनुसार केंद्र सरकार से इस वित्त वर्ष के अनुदान की एक भी किस्त जारी नहीं हुई है। बीते साल अगस्त-सितंबर तक इसका पैसा नगर निगम को मिल गया था। पिछले साल नगर निगम को 45 करोड़ रुपये जारी हुए थे। इस बार अनुदान जारी होने में न सिर्फ देरी हो रही है बल्कि इसमें भारी कटौती भी की जा रही है। केंद्र से इस बार महज 12 करोड़ रुपये अनुदान मिलेगा। यह पैसा भी कब आएगा, इसका पता नहीं है। महापौर सुरेंद्र चौहान दिल्ली जाकर भी अनुदान जारी करने का मामला उठा चुके हैं।





जमीन भी लीज पर देंगे
महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि नगर निगम अपनी खाली जमीन भी लीज पर देगा। टैक्सी यूनियनों समेत जो लोग अपने खर्च पर निगम की जमीन पर दफ्तर आदि बनाना चाहते हैं, वह इसके लिए नगर निगम के पास आवेदन कर सकते हैं। नगर निगम इसके एवज में लीज शुल्क वसूलेगा। इससे कमाई बढ़ेगी जिससे जनता के काम हो सकेंगे।
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