शिमला: जेबीटी और सीएंडवी के अंतर जिला तबादलों का मसला कैबिनेट बैठक में होगा हल
जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों के अंतर जिला तबादलों से प्रभावित हो रही नियमितीकरण प्रक्रिया का हल कैबिनेट बैठक में निकाला जाएगा। इसके अलावा मल्टी टास्क वर्करों के आठ हजार पद भरने को लेकर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है।
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे जेबीटी और सीएंडवी शिक्षकों के अंतर जिला तबादलों से प्रभावित हो रही नियमितीकरण प्रक्रिया का हल कैबिनेट बैठक में निकाला जाएगा। शिक्षा विभाग इस प्रस्ताव में संशोधन करने जा रहा है। कुछ जिलों में इन शिक्षकों के तबादले होने पर उन्हें नियमित करते हुए वरिष्ठता को नजरअंदाज किया जा रहा है। सोमवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस मामले को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा मल्टी टास्क वर्करों के आठ हजार पद भरने को लेकर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। सरकार ने हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री की संस्तुति पर चार हजार पद भरने के फैसले को वापस ले लिया है। अब सभी आठ हजार पद भर्ती नियमों के तहत भरे जाने हैं। इसके अलावा पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को स्कूलों में बुलाने या ऑनलाइन ही पढ़ाई जारी रखने को लेकर भी बैठक में फैसला होगा। शिक्षा विभाग ने तीसरी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को 17 फरवरी से स्कूलों में बुलाने का प्रस्ताव दिया है। पहली और दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों की अभी ऑनलाइन पढ़ाई ही जारी रखने की सिफारिश की गई है।
मंत्रिमंडल से कंप्यूटर शिक्षकों के पद भरने की उठाई मांग
वहीं, कंप्यूटर प्रोफेशनल एसोसिएशन ने सोमवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में कंप्यूटर शिक्षित युवाओं के लिए प्रदेश के स्कूल एवं कॉलेजों में कंप्यूटर अध्यापकों के पद सृजित करने तथा इन्हें कमीशन के माध्यम से शीघ्र भरने की की मांग की है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष पीयूष सेवल, उपाध्यक्ष रजनी समता और वित्त सचिव उमेश्वर सिंह ने कहा कि प्रदेश के 40 हजार से अधिक कंप्यूटर शिक्षित युवाओं की मांगों पर चर्चा के लिए एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल के तमाम मंत्रियों से निवेदन किया है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के 130 से अधिक राजकीय महाविद्यालय में से महज 35 महाविद्यालयों में कंप्यूटर की शिक्षा प्रदान की जा रही है, जबकि प्रदेश विश्वविद्यालय सहित सरकार के तमाम विभाग ऑनलाइन हो चुके हैं। इनके विभिन्न कार्य आज ऑनलाइन प्रणाली से ही संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश के चुनिंदा महाविद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा प्रदान करना तर्कसंगत नहीं है। सभी महाविद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा प्रदान ना किए जाने के कारण विद्यार्थी सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से नहीं जुड़ पा रहे हैं। उन्होंने सरकार से निवेदन किया है कि अन्य विषयों की तर्ज पर कंप्यूटर एप्लीकेशन विषय भी प्रदेश के समस्त महाविद्यालयों में संचालित किया जाए। कंप्यूटर शिक्षकों के पदों को शीघ्र भरा जाए।