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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   The idea to build Atal tunnel Rohtang came 160 years ago

160 साल पहले आया था अटल सुरंग रोहतांग बनाने का विचार, ऐसे सिरे चढ़ी योजना

Sun, 20 Sep 2020 12:09 PM IST
Krishan Singh हरिराम चौधरी, अमर उजाला, सैंज (कुल्लू)
हरिराम चौधरी, अमर उजाला, सैंज (कुल्लू) Published by: Krishan Singh Updated Sun, 20 Sep 2020 12:09 PM IST
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The idea to build Atal tunnel Rohtang came 160 years ago
अटल सुंरग रोहतांग - फोटो : अमर उजाला

सामरिक महत्व की  अटल सुरंग रोहतांग को बनाने का विचार करीब 160 साल पुराना है। सुरंग का डिजाइन तैयार करने वाली ऑस्ट्रेलियाई कंपनी स्नोई माउंटेन इंजीनियरिंग ने अपनी वेबसाइट में दावा किया है कि रोहतांग दर्रे पर सुरंग बनाने का पहला विचार 1860 में मोरावियन मिशन ने रखा था। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में भी रोहतांग दर्रे पर रोप-वे बनाने का प्रस्ताव आया था।

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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार में मनाली-लेह के बीच साल भर कनेक्टिविटी को सड़क निर्माण की परियोजना बनी। इसे मूर्त रूप पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मिला। उन्होंने वर्ष 2002 में रोहतांग दर्रे पर सुरंग बनाने की परियोजना की घोषणा की। वर्ष 2019 में वाजपेयी के नाम पर ही सुरंग का नाम अटल सुरंग रखा गया। पूर्वी पीर पंजाल की पर्वत शृंखला में बनी 9.02 किमी लंबी यह सुरंग लेह-मनाली राजमार्ग पर है। यह करीब 10.5 मीटर चौड़ी और 5.52 मीटर ऊंची है। 
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टनल का निर्माण कर रही कंपनी एफकॉन के हाइड्रो एंड अंडरग्राउंड कारोबार के निदेशक सतीश परेटकर ने कहा कि घोड़े के नाल के आकार की इस सुरंग ने देश के इंजीनियरिंग के इतिहास में कई कीर्तिमान रचे हैं। बहुत से ऐसे काम हैं, जिन्हें पहली बार इस परियोजना में अंजाम दिया गया। इस एकल सुरंग में डबल लेन सड़क होगी। समुद्र तल से दस हजार फीट की ऊंचाई पर बनी दुनिया की सबसे लंबी वाहन योग्य सुरंग है। यह देश की पहली ऐसी सुरंग होगी, जिसमें मुख्य सुरंग के भीतर ही बचाव सुरंग बनाई गई है। 

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रोवा फ्लायर प्रौद्योगिकी का किया गया है उपयोग

The idea to build Atal tunnel Rohtang came 160 years ago
अटल टनल रोहतांग - फोटो : अमर उजाला

परेटकर ने कहा कि यह पहली ऐसी सुरंग है, जिसमें रोवा फ्लायर टेक्नालॉजी का उपयोग किया गया है। यह तकनीक विपरीत स्थिति में इंजीनियरों को काम करने में सक्षम बनाती है। सुरंग बनने में हुई देरी की मुख्य वजह 410 मीटर लंबा सेरी नाला है। यह नाला हर सेकेंड 125 लीटर से अधिक पानी निकालता है। सेरी नाला क्षेत्र में ही सुरंग का दक्षिणी द्वार पड़ता है। कमजोर भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों के चलते इंजीनियरों को इस क्षेत्र में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इसकी वजह से बार-बार सुरंग का दरवाजा बंद हो जाता था।

इंजीनियरों और मजदूरों ने दस साल की कड़ी मेहनत
सीमा सड़क संगठन ने वर्ष 2009 में शापूरजी पोलोनजी समूह की कंपनी एफकॉन और ऑस्ट्रिया की कंपनी स्टारबैग के संयुक्त उपक्रम को इस टनल के निर्माण का ठेका दिया और इसके निर्माण कार्य में एक दशक से अधिक वक्त लगा। एफकॉन ने इस सुरंग के निर्माण में करीब 150 इंजीनियरों और एक हजार  श्रमिकों को लगाया था।

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