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Himachal: सराहन के 800 साल पुराने मां भीमाकाली मंदिर की नींव धंसी, श्रद्धालु चिंतित, जानें रोचक इतिहास
Wed, 14 Sep 2022 11:17 AM IST
Krishan Singh
मोहन मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, ज्यूरी (रामपुर बुशहर)
मोहन मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, ज्यूरी (रामपुर बुशहर)
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 14 Sep 2022 11:17 AM IST
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800 साल पुराना मां भीमाकाली मंदिर।
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विस्तार
देशभर में विख्यात सराहन के 800 साल पुराने मां भीमाकाली मंदिर की नींव धंसने से मंदिर एक ओर झुक रहा है। इससे 51 शक्तिपीठों में से एक माता के मुख्य मंदिर के गिरने का खतरा हो गया है। मां भीमाकाली बुशहर रियासत के राज परिवार की कुल देवी हैं। मंदिर का पुनर्निर्माण वर्ष 1943 में तत्कालीन राजा पदम सिंह ने करवाया था। मंदिर राजधानी शिमला से 200 किलोमीटर दूर रामपुर बुशहर के सराहन में स्थित है। मुख्य मंदिर के नीचे की जमीन धंसने से मंदिर का एक कोना धीरे-धीरे एक तरफ झुकता जा रहा है।
इससे मंदिर न्यास प्रबंधन और श्रद्धालु चिंतित हैं। इस मंदिर में मां भीमाकाली के कन्या और सुहागिन दोनों रूप विराजमान हैं। वर्ष भर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस मंदिर के ऊपर की आखिरी मंजिल में माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के निरंतर मंदिर में ऊपर-नीचे आने-जाने से लकड़ी और पत्थर से बनी अनूठी शैली का यह मंदिर हिलता भी रहता है, जिस कारण मंदिर के झुकने का ज्यादा खतरा बना हुआ है। आम दिनों की अपेक्षा नवरात्र में श्रद्धालुओं की ज्यादा संख्या मंदिर को खतरे में डाल सकती है।
न्यास ने मंदिर को धंसने से बचाने के लिए जारी किए 17 लाख रुपये
भीमाकाली मंदिर न्यास के उपाध्यक्ष एवं एसडीएम रामपुर सुरेंद्र मोहन ने बताया कि मंदिर को धंसने से रोकने के लिए लोक निर्माण विभाग मंडल रामपुर को न्यास ने 17 लाख रुपये जारी कर दिए हैं। मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए और राशि की जरूरत होगी तो विभाग को दी जाएगी। लोक निर्माण विभाग से उम्मीद है कि वह इस पर तेजी से कार्य कर मंदिर को सुरक्षित करेंगे।
बाणासुर के श्रोणितपुर की राजधानी भी माना जाता है सराहन
सराहन की पहचान पुराणों में वर्णित तत्कालीन श्रोणितपुर के रूप में की जाती है। सराहन बुशहर राज्य के पूर्व शासकों की राजधानी थी। बुशहर राजवंश पहले किन्नौर की सांगला घाटी के कामरू से रियासत को नियंत्रित करता था। बाद में इसकी राजधानी सराहन के लिए स्थानांतरित कर दी गई, जो कभी श्रोणितपुर राज्य की राजधानी माना जाता था। सराहन के बाद राजा राम सिंह ने रामपुर को अपनी राजधानी बनाया। एक जनश्रुति के अनुसार भगवान शिव के भक्त और प्रह्लाद के प्रपौत्र बाणासुर के राज्य श्रोणितपुर की यही सराहन राजधानी रहा है।
करीब चार-पांच हजार साल पहले द्वापर युग में बाणासुर की पुत्री उषा का कृष्ण के प्रपौत्र अनिरुद्ध से यहीं से हरण विवाह हुआ था। उसके बाद इसी क्षेत्र में कृष्ण और बाणासुर का संग्राम हुआ, लेकिन भक्त प्रह्लाद को विष्णु के दिए बचन के बाद बाणासुर की एक हजार भुजाएं काटकर कृष्ण ने उसे छोड़ दिया था। मंदिर प्रांगण में दुर्गा सप्तशती के एक श्लोक को भी उकेरा गया है, जिसमें पहाड़ों में दानवों के संहार के लिए भीमा देवी के प्रकट होने की बात की गई है। यहां इसी भीमा देवी की स्थापना है, जो बुशहर रियासत की भी इष्टदेवी है। एक जनश्रुति यह भी है कि यहां पर शिवपत्नी सती का कान गिरा था।