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हिमाचल: छह साल चली एचआरटीसी टिकट रिफंड की लड़ाई, लौटाना होगा अब पैसा, जानें पूरा मामला

Tue, 24 Jun 2025 11:46 AM IST
Krishan Singh दीपक मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
दीपक मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 24 Jun 2025 11:46 AM IST
सार

अदालत ने  निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को 45 दिन के भीतर शिकायत दर्ज करने से वसूली तक 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित यह राशि वापस करें।

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The fight for hrtc ticket refund lasted for six years, now the money will have to be returned, know the whole
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लाख सुविधाओं का दावा करने वाले एचआरटीसी (हिमाचल पथ परिवहन निगम) की पोल राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के एक फैसले से खुल गई। जिला मंडी की तहसील पधर निवासी इंद्रजीत सिंह ने एचआरटीसी से दिल्ली से मंडी तक की यात्रा के लिए 574 रुपये और सामान के लिए 1,565 रुपये के चार अलग-अलग टिकट खरीदे थे। फ्लाइंग स्क्वायड (सुंदरनगर डिपो) ने वजन मशीन में उपरोक्त सामान का वजन किए बिना 1,108 रुपये का एक और अतिरिक्त टिकट लेने के लिए यात्री को मजबूर किया जोकि अवैध था।

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इस टिकट का रिफंड लेने के लिए पीड़ित व्यक्ति को छह साल की लंबी लड़नी पड़ी। पीड़ित की शिकायत पर राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 27 अप्रैल 2024 को जिला उपभोक्ता आयोग मंडी के पारित आदेश को खारिज करते हुए 1,108 रुपये यात्रि को लौटाने के एचआरटीसी को आदेश किए हैं। निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को 45 दिन के भीतर शिकायत दर्ज करने से वसूली तक 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित यह राशि वापस करें। दरअसल 10 अप्रैल 2019 को शिकायतकर्ता इंद्रजीत सिंह ने एचआरटीसी बस में सवार होकर दिल्ली से मंडी तक की यात्रा और सामान के लिए 574 रुपये और 496 रुपये की टिकट खरीदी। 

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शिकायतकर्ता को रिश्तेदार के माध्यम से मंडी में एक और सामान भेजना था लेकिन रिश्तेदार समय पर चंडीगढ़ नहीं पहुंच सका, इसलिए उसने फिर से 652 रुपये का भुगतान करके 200 किग्रा वजन के सामान के लिए एक और टिकट ली। रोपड़ से शिकायतकर्ता ने 80 किग्रा का एक और सामान लिया। इसे नेरचौक ले जाना था और कंडक्टर ने 237 रुपये के भुगतान पर 100 किग्रा सामान के लिए टिकट जारी किया। इसके बाद बिलासपुर से फिर से कंडक्टर ने 180 रुपये में 100 किलोग्राम सामान के लिए एक और टिकट जारी किया। इसी दौरान सुंदरनगर (पुंघ) पहुंचने पर बस को फ्लाइंग स्क्वायड की टीम ने जांच के लिए रोका। निरीक्षकों के पूछने पर शिकायतकर्ता ने सभी टिकटें दिखाई। लेकिन निरीक्षकों ने उसका सामान बस से बाहर निकाला और टिप्पणी की कि सामान की टिकटें कम दर की थीं।

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एचआरीटीसी का कृत्य अनुचित व्यापार व्यहवार : आयोग
शिकायतकर्ता ने 15 मई 2019 को मंडी उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया लेकिन आयोग ने आवेदन को लागत के साथ खारिज कर दिया था। इस आदेश से व्यथित होकर शिकायतकर्ता ने राज्य उपभोक्ता आयोग के समक्ष तत्काल अपील दायर की। आयोग ने माना कि इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीन की रिपोर्ट के मुताबिक 10 अप्रैल 2019 को शिकायतकर्ता को दिल्ली से मंडी तक की यात्रा तथा उसके सामान के लिए भी टिकट जारी किए थे। एचआरटीसी का किया गया यह कृत्य अनुचित व्यापार व्यवहार है। अब राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष एवं न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता ने 27 अप्रैल 2024 को जिला उपभोक्ता आयोग मंडी के पारित आदेश के विरुद्ध दायर अपील को स्वीकार करते हुए फैसले के आदेश को खारिज कर पैसा वापस करने के आदेश दिए हैं। एचआरटीसी को आदेश किए हैं। 

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