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Apple Growers Issues: सरकार पर भारी ना पड़ जाए हिमाचल के बागवानों की नाराजगी, पढ़ें पूरा मामला
Sat, 06 Aug 2022 12:10 PM IST
Krishan Singh
विपिन काला, शिमला
विपिन काला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 06 Aug 2022 12:10 PM IST
सार
सरकार ने पिछले साल सेब पैकिंग के लिए पहले प्लास्टिक क्रेट थोपने की कोशिश की और अब सेब कार्टन पर 18 फीसदी जीएसटी थोपकर आग में घी डालने जैसा फैसला लिया है। हालांकि, सरकार को जीएसटी का छह फीसदी हिस्सा बागवानों को उपदान देकर रिफंड करने का निर्णय बागवानों की नाराजगी के आगे दबाव में लेना पड़ा है।
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शिमला में बागवानों का प्रदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के बागवानों की नाराजगी विधानसभा चुनाव से पहले कहीं सरकार पर भारी न पड़ जाए। प्रदेश सरकार सेब बागवानों के ज्वलंत मुद्दों से बुरी तरह से घिर चुकी है। अब सरकार डैमेज कंट्रोल में जुटी है। सरकार ने पिछले साल सेब पैकिंग के लिए पहले प्लास्टिक क्रेट थोपने की कोशिश की और अब सेब कार्टन पर 18 फीसदी जीएसटी थोपकर आग में घी डालने जैसा फैसला लिया है। हालांकि, सरकार को जीएसटी का छह फीसदी हिस्सा बागवानों को उपदान देकर रिफंड करने का निर्णय बागवानों की नाराजगी के आगे दबाव में लेना पड़ा है।
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बागवानों से जुड़े मुद्दे भुनाने के लिए सभी राजनीतिक दल कोई मौका चूकना नहीं चाहते हैं। यही कारण है कि सेब बागवानी से जुड़े विभिन्न दलों खासकर कांग्रेस, माकपा और आम आदमी पार्टी के नेता बागवानों के शुक्रवार को हुए आंदोलन में बिना किसी संकोच के हिस्सा लेने सचिवालय के बाहर पहुंचे। इन दलों के कई नेता और कार्यकर्ता कह रहे थे कि वह पहले बागवान हैं। उनकी और परिवार की साल भर की रोजी-रोटी का सवाल है। कांग्रेस, माकपा और आप के नेता बागवानों के मुद्दों को विधानसभा चुनाव में भुनाने का कोई मौका भी नहीं गंवाना चाहते।
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सरकार ने पहले उपदान पर बागवानी की दवाएं देनी बंद कर दीं और नई व्यवस्था के तहत तय चार हजार की अधिकतम सब्सिडी देने का फैसला लिया। सेब सीजन से पहले बागवानों को छिड़काव के लिए बाजार से महंगी दवाएं खरीदने को विवश होना पड़ा। बागवानों की नाराजगी देखकर सरकार को अपना फैसला पलटना पड़ा और पुरानी व्यवस्था के अनुसार उपदान की दवाई दी जाने लगी। विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने का मामला भी नहीं सुलझ पाया है। हिमाचल के सेब को बिचौलिए अधिक दाम नहीं दे रहे।
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मंडियों में जो सेब पिछले साल 2600 रुपये प्रति बीस किलो की पेटी बिका था। इस साल वह सेब 1,700 रुपये से नीचे बिक रहा है। विदेशी सेब की मार हिमाचली सेब पर पड़ रही है। हिमाचल प्रदेश फल एवं सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान कहते हैं कि 5,500 करोड़ रुपये तक की सेब अर्थव्यवस्था से लाखों बागवान जुड़े हैं। इनकी लंबे समय से उपेक्षा की जा रही है। अब बागवानों को मजबूर होकर सड़कों पर आना पड़ा है। सरकार बागवानों के मुद्दों को प्राथमिकता में सुलझाए और बागवानी को उजड़ने से बचाए।