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Shimla News: रणनीति, संगठन और बहुमत के दम पर भाजपा ने रचा इतिहास

Wed, 01 Jul 2026 12:46 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 12:46 AM IST
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The BJP made history on the strength of its strategy, organization, and majority.
डेढ़ महीने की सियासी कवायद के बाद भी कांग्रेस नहीं दिखा सकी दम
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अध्यक्ष-उपाध्यक्ष दोनों पदों पर निर्विरोध जीत

संवाद न्यूज एजेंसी

घुमारवीं (बिलासपुर)। करीब 30 वर्ष में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ नगर परिषद की सत्ता पर कब्जा जमाते हुए यह साबित कर दिया कि मजबूत संगठन, अनुशासन और सटीक रणनीति चुनावी राजनीति में सबसे बड़ी ताकत होती है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा ने अपने सभी पार्षदों को अंत तक एकजुट रखा, जबकि डेढ़ महीने तक चली राजनीतिक हलचल और तमाम अटकलों के बावजूद कांग्रेस भाजपा के बहुमत को चुनौती देने वाला कोई समीकरण तैयार नहीं कर सकी।

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव कराने में डेढ़ महीने से अधिक का समय लगने के कारण पूरे क्षेत्र में लगातार राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। हर राजनीतिक और गैर-राजनीतिक मंच पर यही चर्चा थी कि कांग्रेस इस अतिरिक्त समय का इस्तेमाल कर कोई बड़ा राजनीतिक दांव चलेगी। भाजपा लगातार कांग्रेस पर उसके पार्षदों को प्रभावित करने के प्रयासों के आरोप लगाती रही, जबकि कांग्रेस भी पर्दे के पीछे किसी बड़े राजनीतिक समीकरण की संभावनाओं के संकेत देती रही। ऐसे माहौल में अंतिम समय तक राजनीतिक उलटफेर की चर्चाएं बनी रहीं। हालांकि चुनाव वाले दिन सभी अटकलों पर विराम लग गया। कांग्रेस ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए अपने उम्मीदवारों के नामांकन तो दाखिल किए, लेकिन बाद में दोनों नाम वापस ले लिए। राजनीतिक जानकार इसे केवल नामांकन वापसी नहीं, बल्कि इस बात का संकेत मान रहे हैं कि कांग्रेस अंतिम समय तक भाजपा के बहुमत को चुनौती देने लायक समर्थन जुटाने में सफल नहीं हो सकी। चुनावी मुकाबले से पीछे हटने के फैसले ने कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक तैयारी पर भी सवाल खड़े कर दिए।
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दूसरी ओर भाजपा पूरे घटनाक्रम के दौरान पूरी तरह संगठित नजर आई। पार्टी के सभी पार्षद एकजुट रहे और इसी संगठनात्मक मजबूती के दम पर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर निर्विरोध जीत दर्ज कर पार्टी ने नगर परिषद के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। राजनीतिक हलकों में इसे केवल संख्या बल की नहीं, बल्कि प्रभावी राजनीतिक प्रबंधन और अनुशासन की भी जीत माना जा रहा है। चुनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू प्रदेश सरकार का वह नया प्रावधान भी रहा, जिसके तहत नगर निकायों में संबंधित विधायक को मतदान का अधिकार दिया गया है। माना जा रहा था कि यह व्यवस्था कई स्थानों पर सत्ता का समीकरण बदल सकती है। घुमारवीं में भी विधायक के वोट को लेकर चर्चाएं रहीं, लेकिन भाजपा का बहुमत इतना मजबूत रहा कि विधायक के मतदान की नौबत ही नहीं आई। कांग्रेस के चुनाव मैदान से हटने के साथ ही भाजपा की जीत तय हो गई। राजनीतिक दृष्टि से यह परिणाम भाजपा के लिए संगठनात्मक मजबूती और नेतृत्व की बड़ी सफलता माना जा रहा है। कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का विषय बन गया है कि डेढ़ महीने का समय मिलने के बावजूद वह प्रभावी रणनीति तैयार नहीं कर सकी और अंत में चुनावी मुकाबले से पीछे हटना पड़ा। आने वाले स्थानीय चुनावों की राजनीति में यह परिणाम दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
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