फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   The Ahoi Ashtami fast is observed for the long life of one's children.

Shimla News: संतान की लंबी उम्र के लिए अहोई अष्टमी का व्रत एक को

Thu, 29 Oct 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
The Ahoi Ashtami fast is observed for the long life of one's children.
तारों की छांव में होगी संतान की लंबी उम्र की कामना, शाम 5:36 से 6:54 बजे तक होगी अहोई माता की पूजा
विज्ञापन

संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए माताएं रखेंगी निर्जला व्रत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए माताएं एक नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत रखेंगी। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व है।

मान्यता है कि अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करने और तारों को अर्घ्य देने से संतान पर माता की कृपा बनी रहती है। इस दिन माताएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम को शुभ मुहूर्त में अहोई माता की पूजा करेंगी। इसके बाद तारों के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देंगी और व्रत का पारण करेंगी। गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश चंद्र नौटियाल ने बताया कि पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि एक नवंबर को दोपहर 2:51 बजे शुरू होगी और 2 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे समाप्त होगी। उन्होंने बताया कि अहोई अष्टमी पर पूजा के लिए शाम का समय विशेष माना जाता है। उन्होंने बताया कि एक नवंबर को अहोई माता की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 से 6:54 बजे तक रहेगा। इसकी अवधि एक घंटा 18 मिनट है। वहीं शाम के समय लगभग छह बजे तारे दिखाई देने की संभावना है। माताएं तारों के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देंगी और संतान की खुशहाली की प्रार्थना करेंगी। अहोई अष्टमी पर चंद्रमा के दर्शन करने वाली माताओं के लिए चंद्रोदय का समय रात 11:40 बजे बताया है। पंडित नौटियाल ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत संतान की मंगलकामना के लिए किया जाता है। इस दिन माता पार्वती के अहोई माता स्वरूप की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाली माताएं अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य, दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना करती हैं।
विज्ञापन



तारों के दर्शन का विशेष महत्व
अहोई अष्टमी पर तारों के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि जिस तरह आकाश में तारे हमेशा टिमटिमाते रहते हैं, उसी तरह संतान का भविष्य भी उज्ज्वल बना रहे। इस कामना के साथ माताएं अहोई अष्टमी पर तारों की पूजा कर उन्हें अर्घ्य देती हैं और अपनी संतान की सुख-समृद्धि तथा दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। इसमें जिस तरह तारों के बिना आकाश अधूरा माना जाता है, उसी तरह संतान को माता-पिता के जीवन का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। इस भाव के साथ माताएं तारों को अर्घ्य देकर अपनी संतान की सुख-शांति और सलामती की कामना करती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article