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16th Finance Commission Meeting: 'आपदा राहत राशि आवंटन के लिए हिमाचल को अलग से नहीं देखे सकते'

Mon, 24 Jun 2024 06:39 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 24 Jun 2024 06:39 PM IST
सार

16वें वित्त आयोग ने सोमवार को प्रदेश सरकार के साथ राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ में महत्वपूर्ण बैठक की।

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The 16th Finance Commission held a meeting with the state government in Shimla
वित्त आयोग की बैठक में सीएम सुक्खू व अन्य। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने कहा है कि आपदा राहत राशि आवंटन के लिए हिमाचल को अलग से नहीं देखा जा सकता है। देश में 28 राज्य और केंद्र सरकार हैं। इन सबको एक साथ दृष्टिगत रखा जाएगा। राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में पत्रकार वार्ता में पनगढ़िया ने कहा कि हिमाचल पहला राज्य है, जहां आयोग सबसे पहले दौरे पर आया है। सभी राज्यों के अध्ययन के बाद ही केंद्रीय मदद पर विचार किया जाएगा।

इससे पहले आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने मुख्यमंत्री सुक्खू और कैबिनेट के मंत्रियों से विचार-विमर्श किया। प्रधान सचिव वित्त ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर बात की। मुख्यमंत्री सुक्खू ने पिछले 15वें वित्तायोग की ओर से हिमाचल के हितों की अनदेखी करने का मामला उठाया। मुख्यमंत्री ने आयोग के साथ बैठक में कहा कि 15वें वित्तायोग की ओर से जो आपदा राहत इंडेक्स इस्तेमाल किया गया, उसमें हिमाचल की जरूरतों का ध्यान नहीं रखा गया।
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कई राज्यों में पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू किया जा रहा है तो क्या यह भी आयोग के विचाराधीन है। इस पर पनगढि़या ने कहा कि ओपीएस भी एक मुद्दा है, जिसे वित्त आयोग देखेगा। राज्य सरकार के साथ हुई बैठक में प्रदेश के वित्तीय मुद्दों पर चर्चा हुई। आयोग की सिफारिशें 2026-26 से लेकर 2030-31 के लिए लागू होंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़कों और हवाई अड्डों के लिए नहीं, बल्कि स्कूलों, मेडिकल कॉलेजों से जुड़े आधारभूत ढांचे को विकसित में लागत ज्यादा आ रही है।

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केंद्र ने नुकसान की एवज में नहीं दिए 9,042 करोड़ : सुक्खू
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से संवेदनशील है। ऐसे में हिमाचल को आपदा पूर्व प्रबंधन एवं राहत कार्यों की दृष्टि से विशेष प्राथमिकता प्रदान की जानी चाहिए। हिमाचल सहित अन्य हिमालयी क्षेत्र के राज्यों में आपदाओं की अधिक संभावनाएं होने के कारण इन क्षेत्रों के लिए आपदा जोखिम सूचकांक तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने आयोग को बताया कि पिछले साल भारी बरसात में बारिश- बाढ़ से हुए नुकसान के एवज में केंद्र सरकार ने 9,042 करोड़ रुपये अभी तक नहीं दिए हैं।




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