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Shimla News: मरीजों पर थोपा टेंपो ट्रैवलर का 120 रुपये किराया, विरोध शुरू
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आईएसबीटी से चमियाना के लिए शुरू की टेंपो ट्रैवलर सेवा का लोगों ने किया, बोले-किराया एक तरफ का 60 रुपये ही सही
टेंपो महंगा पड़ रहा है तो साधारण छोटी बसें चलाए निगम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना के लिए शुरू की गई परिवहन निगम की टेंपो ट्रैवलर सेवा का किराया 120 रुपये तय करने का विरोध शुरू हो गया है। लोगों का कहना है कि टेंपो ट्रैवलर में एक मरीज और उसके साथ अगर एक तीमारदार है तो एक तरफ का किराया ही 240 रुपये लग जाएगा। इसके अलावा वापसी में भी इतनी ही राशि खर्च होगी। बीमार लोगों पर भारी भरकम किराया थोपना सही नहीं है। लोगों ने मांग की है कि साधारण बस किराये पर परिवहन सेवा मुहैया करवाई जाए। निगम को अगर टेंपो ट्रैवलर महंगा पड़ रहा है तो इस रूट पर छोटी इलेक्टि्रक बसें भी चलाई जा सकती हैं। बसें चलने से लोग महज तीस से चालीस रुपये में चमियाना अस्पताल पहुंच जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ टेंपो ट्रैवलर सेवा को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है लेकिन किराया 120 रुपये तय करना अखर रहा है। टैक्सी सेवा शुरू होने से न केवल अस्पताल जाने वाले मरीजों को सुविधा मिली है, बल्कि रोज अस्पताल में सुबह से शाम तक शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों को भी राहत मिली है। वहीं चमियाना फैकल्टी एसोसिएशन के महासचिव डाॅ. यशवंत वर्मा ने परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक निपुन जिंदल का टेंपो ट्रैवलर चलाने पर आभार जताया है। साथ ही उनसे ट्रैवलर के लिए निर्धारित की गई किराये की दरों को आधा करने की मांग की है। उन्होंने आईएसबीटी से चमियाना अस्पताल तक का किराया प्रति सवारी 120 से घटाकर 60 रुपये और मैहली से चमियाना का किराया 30 रुपये तय करने की मांग की है।
मरीजों को मिल रहा लाभ, किराया घटना जरूरी
एसोसिएशन के महासचिव डाॅ. यशवंत वर्मा ने कहा कि निगम की इस टैक्सी सेवा का आने वाले समय में रोज आने वाले सैकड़ों मरीजों और उनके तीमारदारों को लाभ मिलेगा उनका अस्पताल तक का सफर सुगम हो जाएगा। लोगों को अब बार-बार बसें बदलने की जरूरत नहीं है। प्राइवेट टैक्सी में सफर करने पर मजबूर नहीं होना पड़ेगा। मरीजों के साथ ही अधिकतर अनुबंध आधार पर कार्य करने वाले कर्मचारी भी अस्पताल आते हैं। वह रोज टैंपो ट्रेवलर में आने-जाने के लिए 240 रुपये खर्च नहीं कर सकते। इसलिए न्यूनतम किराया तय किया जाए। फैकल्टी एसोसिएशन के महासचिव डॉ. यशवंत वर्मा ने दावा किया कि निगम के प्रबंध निदेशक ने जल्द कोई सकारात्मक फैसला लेने का आश्वासन दिया है।
सस्ते किराये पर दें परिवहन सेवा : ठाकुर
चमियाना अस्पताल के लिए मरीजों और कर्मचारियों की सुविधा के लिए टेंपो ट्रैवलर सेवा का ट्रायल किए जाने का शिमला नागरिक सभा ने स्वागत किया है। सभा के अध्यक्ष जगमोहन ठाकुर ने कहा कि चमियाना अस्पताल के कर्मचारियों के लिए इस रूट पर पहले ही अस्पताल की ओर से बड़ी निजी बस चलती हैं। इससे साफ है कि रूट पर निगम की बस भी चल सकती है। स्थानीय प्रशासन और परिवहन निगम इस रूट पर निगम की बस चलाएं। इससे मरीजों और अस्पताल के कर्मचारियों को सस्ती दरों पर परिवहन सेवा मिलेगी। आईएसबीटी से यदि किसी मरीज के साथ दो तीमारदार हैं, तो उसे एक तरफ का टेंपो ट्रैवलर का किराया 360 रुपये के हिसाब से देना पड़ेगा। इससे आने-आने में ही किराये पर 720 रुपये खर्च हो जाएंगे।
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अस्पताल जाते हैं मजबूर लोग, कम हो किराया : कश्यप
नागरिक सभा के अध्यक्ष विवेक कश्यप ने कहा कि अस्पताल मजबूर लोग ही जाते हैं। टेंपो ट्रैवलर में कम सवारी आती है, जिसमें भीड़ होने पर खड़े होकर सफर करना मुश्किल होता है। इसलिए इस रूट या तो बस चलाई जाए या फिर टेंपो ट्रेवलर के किराये की दरें न्यूनतम तय की जाएं। इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
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टेंपो महंगा पड़ रहा है तो साधारण छोटी बसें चलाए निगम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना के लिए शुरू की गई परिवहन निगम की टेंपो ट्रैवलर सेवा का किराया 120 रुपये तय करने का विरोध शुरू हो गया है। लोगों का कहना है कि टेंपो ट्रैवलर में एक मरीज और उसके साथ अगर एक तीमारदार है तो एक तरफ का किराया ही 240 रुपये लग जाएगा। इसके अलावा वापसी में भी इतनी ही राशि खर्च होगी। बीमार लोगों पर भारी भरकम किराया थोपना सही नहीं है। लोगों ने मांग की है कि साधारण बस किराये पर परिवहन सेवा मुहैया करवाई जाए। निगम को अगर टेंपो ट्रैवलर महंगा पड़ रहा है तो इस रूट पर छोटी इलेक्टि्रक बसें भी चलाई जा सकती हैं। बसें चलने से लोग महज तीस से चालीस रुपये में चमियाना अस्पताल पहुंच जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ टेंपो ट्रैवलर सेवा को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है लेकिन किराया 120 रुपये तय करना अखर रहा है। टैक्सी सेवा शुरू होने से न केवल अस्पताल जाने वाले मरीजों को सुविधा मिली है, बल्कि रोज अस्पताल में सुबह से शाम तक शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों को भी राहत मिली है। वहीं चमियाना फैकल्टी एसोसिएशन के महासचिव डाॅ. यशवंत वर्मा ने परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक निपुन जिंदल का टेंपो ट्रैवलर चलाने पर आभार जताया है। साथ ही उनसे ट्रैवलर के लिए निर्धारित की गई किराये की दरों को आधा करने की मांग की है। उन्होंने आईएसबीटी से चमियाना अस्पताल तक का किराया प्रति सवारी 120 से घटाकर 60 रुपये और मैहली से चमियाना का किराया 30 रुपये तय करने की मांग की है।
मरीजों को मिल रहा लाभ, किराया घटना जरूरी
एसोसिएशन के महासचिव डाॅ. यशवंत वर्मा ने कहा कि निगम की इस टैक्सी सेवा का आने वाले समय में रोज आने वाले सैकड़ों मरीजों और उनके तीमारदारों को लाभ मिलेगा उनका अस्पताल तक का सफर सुगम हो जाएगा। लोगों को अब बार-बार बसें बदलने की जरूरत नहीं है। प्राइवेट टैक्सी में सफर करने पर मजबूर नहीं होना पड़ेगा। मरीजों के साथ ही अधिकतर अनुबंध आधार पर कार्य करने वाले कर्मचारी भी अस्पताल आते हैं। वह रोज टैंपो ट्रेवलर में आने-जाने के लिए 240 रुपये खर्च नहीं कर सकते। इसलिए न्यूनतम किराया तय किया जाए। फैकल्टी एसोसिएशन के महासचिव डॉ. यशवंत वर्मा ने दावा किया कि निगम के प्रबंध निदेशक ने जल्द कोई सकारात्मक फैसला लेने का आश्वासन दिया है।
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सस्ते किराये पर दें परिवहन सेवा : ठाकुर
चमियाना अस्पताल के लिए मरीजों और कर्मचारियों की सुविधा के लिए टेंपो ट्रैवलर सेवा का ट्रायल किए जाने का शिमला नागरिक सभा ने स्वागत किया है। सभा के अध्यक्ष जगमोहन ठाकुर ने कहा कि चमियाना अस्पताल के कर्मचारियों के लिए इस रूट पर पहले ही अस्पताल की ओर से बड़ी निजी बस चलती हैं। इससे साफ है कि रूट पर निगम की बस भी चल सकती है। स्थानीय प्रशासन और परिवहन निगम इस रूट पर निगम की बस चलाएं। इससे मरीजों और अस्पताल के कर्मचारियों को सस्ती दरों पर परिवहन सेवा मिलेगी। आईएसबीटी से यदि किसी मरीज के साथ दो तीमारदार हैं, तो उसे एक तरफ का टेंपो ट्रैवलर का किराया 360 रुपये के हिसाब से देना पड़ेगा। इससे आने-आने में ही किराये पर 720 रुपये खर्च हो जाएंगे।
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अस्पताल जाते हैं मजबूर लोग, कम हो किराया : कश्यप
नागरिक सभा के अध्यक्ष विवेक कश्यप ने कहा कि अस्पताल मजबूर लोग ही जाते हैं। टेंपो ट्रैवलर में कम सवारी आती है, जिसमें भीड़ होने पर खड़े होकर सफर करना मुश्किल होता है। इसलिए इस रूट या तो बस चलाई जाए या फिर टेंपो ट्रेवलर के किराये की दरें न्यूनतम तय की जाएं। इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।