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तकनीकी विवि भूमि सौदे और लैंड चेंज मामले की दोबारा जांच शुरू, रिकॉर्ड मांगा तो छुट्टी चले गए पटवारी

Thu, 05 Dec 2019 10:25 AM IST
Krishan Singh प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर
प्रवीण कुमार, अमर उजाला, हमीरपुर Published by: Krishan Singh Updated Thu, 05 Dec 2019 10:25 AM IST
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Technical university land deal and land change case probe started again

हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर को आवंटित जमीन को गलत तरीके से कारोबारियों के नाम करने के मामले की पौने दो वर्ष बाद दोबारा जांच शुरू हो गई है। लेकिन बीते मंगलवार को जिन पटवारी और कानूनगो को निशानदेही के लिए रिकॉर्ड देने का काम सौंपा था, वे ऐन मौके पर छुट्टी चले गए। दूसरे पटवारी की ड्यूटी लगाई गई लेकिन बिना कानूनगो निशानदेही नहीं हुई। अब दूसरी टीम को भेजकर बुधवार से निशानदेही का काम शुरू किया गया है।

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 अमर उजाला ने 30 मार्च 2018 के अंक में इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। तकनीकी विवि करोड़ों रुपये की इस जमीन को अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहता। विवि ने एसडीएम हमीरपुर से इस मामले में सदर के बजाय किसी दूसरे तहसीलदार से जांच करवाने की अपील की है। एसडीएम ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए टौणी देवी तहसीलदार को जांच और निशानदेही के आदेश दिए हैं।
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विवि का आरोप है कि राजस्व विभाग की मिलीभगत से विवि के लिए प्रस्तावित फोरेस्ट लैंड को दूसरों के नाम कर दिया गया। लेकिन वर्ष 2018 में निशानदेही के दौरान यह गड़बड़झाला पकड़ में आ गया। यहां बेशकीमती जमीन का एक बंजर भूमि के साथ अदला बदला कर दिया गया। मामले का पता लगते ही विवि ने जिला प्रशासन हमीरपुर को इसकी सूचना दी। जिसके बाद जिला प्रशासन ने मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है। जांच के बाद राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।

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यह है मामला

हिमाचल प्रदेश तकनीकी विवि को ग्राम पंचायत दडूही में भूमि आवंटित हुई है। 1300 कनाल भूमि में से 52 कनाल भूमि तकनीकी विवि के नाम हो चुकी है जबकि शेष वन भूमि को तकनीकी विवि के नाम करने के लिए जिला प्रशासन ने फाइल वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को वर्ष 2014 में भेजी हुई है। तकनीकी विवि प्रशासन ने मिल चुकी 52 कनाल भूमि पर भवन निर्माण का कार्य शुरू कर दिया है।

तकनीकी विवि को जिला प्रशासन ने जो जमीन आवंटित की है, उसके नजदीक करीब 8 लोगों को वर्ष 1975 में पट्टे पर जमीन आवंटित हुई थी। हमीरपुर जिला के चार कारोबारियों ने अलाटियों से करीब साढ़े चार कनाल भूमि खरीद ली, जिसकी रजिस्ट्री भी हो चुकी है। लेकिन इसी बीच राजस्व विभाग ने खरीदारों के नाम उस खसरा नंबर की रजिस्ट्री कर दी, जो तकनीकी विवि को अलाट हुआ था।  हैरानी की बात है कि संबंधित खसरा नंबर पर खुदरो दरख्तान यानी वन भूमि लिखा है।

इस खसरा नंबर को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के पास स्वीकृति के लिए राजस्व विभाग ने भेजा हुआ है। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर राजस्व विभाग ने वन भूमि का एफसीए केस बनाकर मंत्रालय को भेजा है तो उक्त खसरा खरीदारों के नाम कैसे कर दिया जबकि मंत्रालय को क्लीयरेंस भेजने वाले और खरीदारों की रजिस्ट्री उन्हीं राजस्व विभाग के अधिकारियों ने की है। यह मामला सामने आते ही बीते साल राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों का हमीरपुर से तबादला भी हुआ था। 

कहां कहते हैं अधिकारी

हमारे पास तकनीकी विवि ने एक पुनर्निरीक्षण अर्जी की है। इस मामले को जांच के लिए हमीरपुर के बजाय टौणी देवी तहसीलदार को दिया गया है ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।- डॉ. चिरंजी लाल चौहान, एसडीएम हमीरपुर

3 दिसंबर को निशानदेही की सूचना मिली थी लेकिन कानूनगो और पटवारी मौके पर नहीं पहुंचे जिसके चलते निशानदेही का कार्य नहीं हो पाया।- राकेश शर्मा, कुल सचिव, हिप्र तकनीकी विवि हमीरपुर

तकनीकी विवि को दडूही में आवंटित भूमि मामले की जांच चल रही है। लोकल पटवारी और कानूनगो ने टौणी देवी के तहसीलदार को रिकॉर्ड उपलब्ध करवाना था लेकिन वे अवकाश पर थे। एक अन्य पटवारी की ड्यूटी लगाई गई थी। बुधवार को दोबारा निशानदेही का काम किया गया।- राजीव ठाकुर, तहसीलदार हमीरपुर

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