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Hamirpur (Himachal) News: खंडहर बन रहा खटवीं स्कूल का भवन, उपयोग की योजना कागजों में दफन
Sat, 22 Aug 2026 02:04 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 22 Aug 2026 02:04 AM IST
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खटवीं स्कूल के खेल मैदान में उगी झाड़ियां। स्रोत जागरूक पाठक
गलोड़ (हमीरपुर)। शिक्षा के क्षेत्र में एजुकेशन हब के रूप में पहचान रखने वाले मुख्यमंत्री के गृह जिले हमीरपुर में राजकीय प्राथमिक स्कूल खटवीं का भवन अब खंडहर में तब्दील हो रहा है। पांच कमरों के भवन के आसपास झाड़ियां उग आई हैं। छत, बरामदे और दरवाजे भी खराब होने लगे हैं।
वर्ष 1980 में शुरू हुई इस पाठशाला ने चार दशक से अधिक समय तक तीन गांवों के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी। कई पीढ़ियों ने यहीं से पढ़ाई की। वर्ष 2023 में छात्र संख्या कम होने के कारण स्कूल बंद कर दिया गया। इसके बाद भवन का इस्तेमाल भी बंद हो गया।
स्कूल बंद होने के बाद शिक्षा विभाग ने ऐसे भवनों को पंचायत, युवक मंडल, महिला मंडल और आंगनबाड़ी केंद्र जैसी सामुदायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी, लेकिन खटवीं स्कूल में यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।
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यहां चलने वाला आंगनबाड़ी केंद्र भी बाद में गांव में स्थानांतरित हो गया। ऐसे में भवन अब देखरेख के अभाव में जर्जर होता जा रहा है।
जिला में 61 स्कूल बंद, 33 भवनों का प्रयोग नहीं
जिले में बीते कुछ वर्षों में 61 सरकारी स्कूल बच्चों की कम संख्या के चलते बंद हुए हैं। 28 स्कूल भवनों का प्रयोग पंचायत और अन्य विभाग कर रहे हैं, लेकिन 33 भवन बिना प्रयोग और रखरखाव के जर्जर होकर खंडहर बन रहे हैं। अब लंबे समय से बंद भवन की देखरेख चुनौती बन गई है। आसपास उगी झाड़ियां और जर्जर होता ढांचा सरकारी संपत्ति की स्थिति बयां कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भवन को खाली छोड़ने के बजाय इसका उपयोग तय किया जाए, जिससे संपत्ति सुरक्षित रहने के साथ लोगों को भी सुविधा मिल सके।
कोट्स
पाठशाला बंद होने के बाद स्कूल में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र भी गांव में स्थानांतरित हो गया है। भवन पिछले करीब तीन वर्षों से बदहाल स्थिति में है। मामला उनके प्रधान बनने से पहले का है। -किरण शर्मा, प्रधान, धनेड़ पंचायत
बंद हुए स्कूल भवनों की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी गई है। संबंधित पंचायतों को भवनों की देखरेख का जिम्मा सौंपा गया है। -कमल किशोर, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, हमीरपुर
स्कूल भवन बंद होने के बाद से लगातार खराब हो रहा है। यदि इसे पंचायत या किसी अन्य सामुदायिक कार्य के लिए उपयोग में लाया जाए तो भवन की स्थिति भी सुधरेगी और ग्रामीणों को सुविधा भी मिलेगी। -सुरेश कुमार, ग्रामीण
स्कूल बंद होने से पहले यहां आसपास के गांवों के बच्चे पढ़ते थे। भवन को खाली छोड़ने के बजाय इसके उपयोग की कोई स्थायी व्यवस्था की जानी चाहिए। -संतोष कुमार, ग्रामीण
सरकार ने भवन को उपयोग में लाने की योजना बनाई थी। पंचायत और संबंधित विभाग को मिलकर पहल करनी चाहिए, ताकि सरकारी संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सके। -आनंद शर्मा, ग्रामीण
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वर्ष 1980 में शुरू हुई इस पाठशाला ने चार दशक से अधिक समय तक तीन गांवों के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी। कई पीढ़ियों ने यहीं से पढ़ाई की। वर्ष 2023 में छात्र संख्या कम होने के कारण स्कूल बंद कर दिया गया। इसके बाद भवन का इस्तेमाल भी बंद हो गया।
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स्कूल बंद होने के बाद शिक्षा विभाग ने ऐसे भवनों को पंचायत, युवक मंडल, महिला मंडल और आंगनबाड़ी केंद्र जैसी सामुदायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी, लेकिन खटवीं स्कूल में यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी।
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यहां चलने वाला आंगनबाड़ी केंद्र भी बाद में गांव में स्थानांतरित हो गया। ऐसे में भवन अब देखरेख के अभाव में जर्जर होता जा रहा है।
जिला में 61 स्कूल बंद, 33 भवनों का प्रयोग नहीं
जिले में बीते कुछ वर्षों में 61 सरकारी स्कूल बच्चों की कम संख्या के चलते बंद हुए हैं। 28 स्कूल भवनों का प्रयोग पंचायत और अन्य विभाग कर रहे हैं, लेकिन 33 भवन बिना प्रयोग और रखरखाव के जर्जर होकर खंडहर बन रहे हैं। अब लंबे समय से बंद भवन की देखरेख चुनौती बन गई है। आसपास उगी झाड़ियां और जर्जर होता ढांचा सरकारी संपत्ति की स्थिति बयां कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भवन को खाली छोड़ने के बजाय इसका उपयोग तय किया जाए, जिससे संपत्ति सुरक्षित रहने के साथ लोगों को भी सुविधा मिल सके।
कोट्स
पाठशाला बंद होने के बाद स्कूल में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र भी गांव में स्थानांतरित हो गया है। भवन पिछले करीब तीन वर्षों से बदहाल स्थिति में है। मामला उनके प्रधान बनने से पहले का है। -किरण शर्मा, प्रधान, धनेड़ पंचायत
बंद हुए स्कूल भवनों की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी गई है। संबंधित पंचायतों को भवनों की देखरेख का जिम्मा सौंपा गया है। -कमल किशोर, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, हमीरपुर
स्कूल भवन बंद होने के बाद से लगातार खराब हो रहा है। यदि इसे पंचायत या किसी अन्य सामुदायिक कार्य के लिए उपयोग में लाया जाए तो भवन की स्थिति भी सुधरेगी और ग्रामीणों को सुविधा भी मिलेगी। -सुरेश कुमार, ग्रामीण
स्कूल बंद होने से पहले यहां आसपास के गांवों के बच्चे पढ़ते थे। भवन को खाली छोड़ने के बजाय इसके उपयोग की कोई स्थायी व्यवस्था की जानी चाहिए। -संतोष कुमार, ग्रामीण
सरकार ने भवन को उपयोग में लाने की योजना बनाई थी। पंचायत और संबंधित विभाग को मिलकर पहल करनी चाहिए, ताकि सरकारी संपत्ति को नुकसान से बचाया जा सके। -आनंद शर्मा, ग्रामीण

खटवीं स्कूल के खेल मैदान में उगी झाड़ियां। स्रोत जागरूक पाठक

खटवीं स्कूल के खेल मैदान में उगी झाड़ियां। स्रोत जागरूक पाठक

खटवीं स्कूल के खेल मैदान में उगी झाड़ियां। स्रोत जागरूक पाठक