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शिक्षकों के लिए अच्छी खबर, नहीं करने पड़ेंगे ये काम

Sun, 17 Jan 2016 10:30 AM IST
Updated Sun, 17 Jan 2016 10:30 AM IST
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teachers have to do no extra duty in himachal schools.

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के कंधों से गैर शिक्षण कार्यों का बोझ घटेगा। सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम बेहतर नहीं रहने के लिए हर साल शिक्षक संघ गैर शिक्षण कार्यों को जिम्मेवार ठहराते आए हैं।

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इस शिकायत को दूर करते हुए सरकार ने शिक्षकों से करवाए जा रहे छात्राओं को आयरन गोलियां देने के गैर शिक्षण कार्यों को आशा वर्कर्स के हवाले करने की तैयारी की है। बीते दिनों सचिवालय में हुई स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम को आशा वर्कर्स के माध्यम से चलाने का फैसला लिया गया।
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अब स्कूलों में आशा वर्कर्स के माध्यम से छात्राओं को आयरन गोली दी जाएगी। पहले अध्यापकों के माध्यम से स्कूलों में इनका वितरण किया जाता था। शिक्षकों को सारे सामान का रिकॉर्ड बनाना पड़ता था। शिक्षकों के अन्य कामों में ही व्यस्त रहने की शिकायतों पर यह बदलाव किया गया है।

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नए सत्र से लागू होगी नई व्यवस्‍था

teachers have to do no extra duty in himachal schools.

नए शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के स्कूलों में नई व्यवस्था लागू होगी। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूलों में हर सप्ताह छात्राओं को आयरन की गोलियां दी जाती हैं। सचिवालय में हुई राज्य स्तरीय मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान ने शिक्षकों के गोलियां बांटने में लग रहे अधिक समय का मामला उठाया।

इस पर अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य विनीत चौधरी ने आशा वर्कर्स के माध्यम से आयरन गोलियां बांटने का प्रस्ताव रखा। इसे सर्वसम्मति से मंजूर किया गया।

आशा वर्कर्स ही बांट रही हैं सेनेटरी नैपकिन
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली 10 से 19 साल की छात्राओं को सेनेटरी नैपकिन भी आशा वर्कर्स के माध्यम से बांटे जा रहे हैं। आशा वर्कर्स स्कूलों में जाकर लड़कियों को नैपकिन उपलब्ध करवाती हैं।

10 से 19 साल की छात्राओं को प्रति माह छह सेनेटरी नैपकिन का एक पैकेट उपलब्ध करवाया जाता है। छह रुपये देकर एक पैकेट मिलता है। सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध करवाने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन ने निजी कंपनियों के साथ अनुबंध किया हुआ है।

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