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छुट्टियों में एक्सट्रा क्लास के फरमान पर भड़के गुरुजी

Sun, 26 Jun 2016 09:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 26 Jun 2016 09:53 AM IST
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Teachers angry by education department decision for extra class in schools

गर्मियों की छुट्टियों में नवीं कक्षा के बच्चों की एक्सट्रा क्लासिज लगाने का विरोध शुरू हो गया है। शिक्षक संघों का कहना है कि तुगलकी फरमान से शिक्षा विभाग परेशान कर रहा है। पूर्व नियोजित कार्यक्रमों में व्यवधान डाला जा रहा है। शिक्षक संघों ने छुट्टियों के बाद रुटीन में एक्सट्रा क्लास लागू करने की मांग की है।

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प्रदेश के ग्रीष्मकालीन स्कूलों में 26 जून से 31 जुलाई तक छुट्टियां पड़ गई है। ऐसे में शिक्षकों को छुट्टियों के दौरान पढ़ाई में कमजोर बच्चों को पढ़ाना रास नहीं आ रहा है। हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान, प्रधान प्रेस सचिव कैलाश ठाकुर, महासचिव संजय कपूर, वित्त सचिव अरुण गुलेरिया, संरक्षक अजीत चौहान, सरोज मेहता, महावीर कैंथला, नरेश महाजन, नरोत्तम वर्मा और सुनील वर्मा ने गर्मियों की छुट्टियों के दौरान शिक्षकों को एक्सट्रा क्लासिज लगाने के लिए विवश करने के फैसले का विरोध किया है।
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संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि बच्चों के लर्निंग लेवल में वृद्धि करने के लिए एक्सट्रा क्लास लगाने के फैसले का हम स्वागत करते हैं। लेकिन शिक्षकों को विवश करने के तुगलकी फरमान का विरोध करते हैं। संघ ने सुझाव दिया है कि इस कार्य का दायित्व या तो सेवानिवृत्त अध्यापकों को सौंपा जाए या फिर प्रशिक्षित बेरोजगार शिक्षकों की सेवाएं ली जाएं।

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20 दिन की पढ़ाई से क्या होगा फायदा

Teachers angry by education department decision for extra class in schools

उधर, विज्ञान अध्यापक संघ के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष मनोजपाल सिंह परिहार का कहना है कि स्कूली शिक्षा और परीक्षा परिणामों के संदर्भ में थोपे जा रहे अव्यवहारिक प्रयोगों और नए-नए दिशा निर्देशों के प्रति शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है। जितनी बनावटी गुणवत्ता ऊपर से थोपी जा रही है, वास्तव में उतनी ही गुणवत्ता और विश्वसनीयता कम हो रही है।

कार्यकारी अध्यक्ष का कहना है कि शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण  और दूरगामी योजनाएं बनाते समय शिक्षकों को विश्वास में नहीं लिया जाता। ग्रीष्मकालीन अवकाश में स्कूलों में 20 दिन पढ़ाई में कमजोर बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देने के लिए शिक्षकों को निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नवीं तक फेल नहीं करने की नीति के चलते बच्चे पढ़ाई में कमजोर हो रहे हैं। ऐसे में 20 दिन की पढ़ाई से बच्चों को क्या फायदा होगा, यह भी बताना चाहिए।

नवीं कक्षा के बच्चों की एक्सट्रा क्लास लगाने के लिए पहली प्राथमिकता शिक्षकों को दी जाएगी। अगर शिक्षक तैयार नहीं होते हैं तो सेवानिवृत्त शिक्षकों और बीएड पास विद्यार्थियों से संपर्क किया जा सकता है। - घनश्याम चंद, राज्य परियोजना निदेशक

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