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शिक्षक दिवस विशेषः बेटे के अंतिम संस्कार के दिन भी स्कूल में दी थी हाजिरी

Wed, 05 Sep 2018 11:33 AM IST
दिनेश जस्पा, अमर उजाला, उदयपुर (लाहौल स्पीति)
दिनेश जस्पा, अमर उजाला, उदयपुर (लाहौल स्पीति) Updated Wed, 05 Sep 2018 11:33 AM IST
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Teacher's day special teacher attended school after funeral of son in lahaul spiti

लाहौल स्पीति के एक शिक्षक मरणोपरांत भी शिक्षकों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। बच्चों को तराशने और ड्यूटी के प्रति सचेत शिव चंद अपने पांच वर्षीय बेटे के अंतिम संस्कार के दिन भी स्कूल में हाजिरी दे चुके हैं।

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प्राथमिक पाठशाला में तैनात रहते वह मिडल और उच्च पाठशालाओं के विद्यार्थियों को उर्दू व गणित पढ़ाते रहे। एक मार्च 2012 को दुनिया छोड़ चुके शिव चंद की प्रतिभा और शिक्षा के प्रति समर्पण आज भी सभी के स्मरण में है।
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शिव चंद जिला के पहले ऐसे अध्यापक हैं जिन्हें 5 सितंबर 1985 को राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सन 1927 को गोहरमा गांव में एक साधारण परिवार में जन्मे शिव चंद शैक्षणिक गतिविधियों में एक मिसाल हैं, जिसे शिक्षक दिवस पर हरेक शख्स याद कर रहा है। 

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उनकी योग्यता देखकर राष्ट्रपति के भी आंसू छलक गए

Teacher's day special teacher attended school after funeral of son in lahaul spiti

शिक्षक दिवस के मौके पर शिव चंद अपने पारंपरिक परिधानों में मंच पर राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक अवार्ड हासिल करने मंच पर पहुंचे थे। जनजातीय लिबास और उनकी योग्यता देखकर राष्ट्रपति के भी आंसू छलक गए थे।

लेकिन शिक्षक दिवस के इस मौके पर लाहौल स्पीति जिला के एक भी शिक्षक का नाम राष्ट्रीय व राज्य पुरस्कार के लिए चयन नहीं हो पाया है। शिक्षा विभाग लाहौल के मुताबिक जिले से एक भी अध्यापक शर्त को पूरा नहीं कर पाया है।

यही वजह रही कि जिले से कोई भी नाम अवार्ड के लिए आगे नहीं भेजा गया है। शिक्षा उपनिदेशक लाहौल प्रेम नाथ परशीरा ने शिक्षक शिव चंद के कार्यों को सराहा है। उन्होंने घाटी के अध्यापकों को उनके पथ चिन्हों पर चलने का आह्वान किया है।

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