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Shimla News: चौड़ा मैदान में टैक्सी यूनियनों का प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ नारेबाजी
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टैक्सी वाहनों की परमिट अवधि 12 साल करने का विरोध, वाहन की फिटनेस को आधार बनाने का आग्रह
प्रदर्शन में हिमाचल के अलावा पंजाब के ऑपरटेर भी हुए शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। टैक्सियों की परमिट अवधि 12 साल करने से खफा टैक्सी ऑपरेटरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऑपरेटरों ने मांग की कि परमिट अवधि वाहन की उम्र से नहीं, बल्कि फिटनेस आधार पर तय की जाए। प्रदर्शन में हिमाचल के अलावा पंजाब के ऑपरेटरों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।
सोमवार को ऑल हिमाचल प्रदेश टैक्सी ऑपरेटर्स एंड ड्राइवर्स वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़ी सैकड़ों टैक्सी यूनियनों ने शिमला के चौड़ा मैदान में प्रदर्शन किया। उन्होंने एलान किया कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। एसोसिएशन की अगुवाई में सैकड़ों की तादाद में लोग चौड़ा मैदान में इकट्ठा हुए। प्रदर्शन में आजाद टैक्सी यूनियन से जुड़े सदस्य भी शामिल हुए। चालकों ने कहा कि टैक्सियों के लिए सरकार की ओर से तय 12 साल की परमिट अवधि उचित नहीं है।
ऑल हिमाचल टैक्सी ऑपरेटर एवं ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राम रत्न ने कहा कि वाहनों की उम्र नहीं, बल्कि फिटनेस को परमिट का आधार बनाया जाना चाहिए। एसोसिएशन का तर्क है कि फिटनेस मानकों पर खरे उतरने वाले वाहनों को 12 साल बाद भी हिमाचल स्टेट परमिट देकर सड़कों पर चलने की अनुमति मिलनी चाहिए। रोजगार के लिए खरीदी गई टैक्सी अब फायदे का नहीं, बल्कि घाटे का सौदा साबित हो रही है।
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कांगड़ा के रानीताल स्थित एटीएस सेंटर को लेकर भी विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वाहनों की पासिंग आरटीओ के तहत ही होनी चाहिए। वर्तमान व्यवस्था के कारण शिमला समेत प्रदेश के कई हिस्सों से वाहन चालकों को पासिंग के लिए 200 से 250 किलोमीटर तक दूर जाना पड़ रहा है। इससे ईंधन, समय और अन्य खर्च का अतिरिक्त बोझ वाहन मालिकों पर पड़ रहा है। एसोसिएशन ने मांग की कि पासिंग की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर आरटीओ के माध्यम से की जाए।
जीपीएस लगाने को लेकर भी यूनियन ने आपत्ति जताई। चालकों ने इसे अनावश्यक झंझट बताते हुए कहा कि जीपीएस को रिचार्ज कराने के लिए भी उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। उनका आरोप है कि जीपीएस से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कई बार वाहनों की पासिंग हो पाती है। यूनियन ने सरकार से इस व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। प्रदर्शन में मैकलोडगंज यूनियन के प्रधान अशोक शर्मा, धर्मशाला टैक्सी यूनियन के प्रधान कपिल देव, टैक्सी मैक्सी एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष अभी ठाकुर, चेयरमैन ऑल हिमाचल प्रदेश टैक्सी ऑपरेटर एसोसिएशन रविंद्र शर्मा, अध्यक्ष राजधानी टेंपो ट्रैवलर एसोसिएशन शिमला अंकित भारद्वाज समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
पंजाब की टैक्सियों से रोड टैक्स वसूली का विरोध
आजाद टैक्सी यूनियन पंजाब से आए चरनजीत सिंह कलसी ने पंजाब से आने वाली टैक्सियों से लिए जा रहे स्टेट रोड टैक्स पर सवाल उठाया। पहले करीब 100 से 200 रुपये लिए जाते थे जबकि अब 900 से 1000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शन को लेकर कहा कि यहां इसके लिए अनुमति ली जाती है, जबकि पंजाब में उन्हें किसी तरह की अनुमति नहीं लेनी पड़ती। समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह उपमुख्यमंत्री के गृह जिले में भी प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शन के दौरान टैक्सी ऑपरेटरों ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी भी की।
सीएम 25 साल पुरानी गाड़ी में आते हैं, हम पर पाबंदी क्यों
चौड़ा मैदान में बैठे प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को वाहन मालिकों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री 25 साल पुरानी गाड़ी में विधानसभा पहुंच सकते हैं तो टैक्सी वाहनों के लिए अलग-अलग तरह की पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं। यूनियन ने सरकार से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान करने की मांग की।
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प्रदर्शन में हिमाचल के अलावा पंजाब के ऑपरटेर भी हुए शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। टैक्सियों की परमिट अवधि 12 साल करने से खफा टैक्सी ऑपरेटरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऑपरेटरों ने मांग की कि परमिट अवधि वाहन की उम्र से नहीं, बल्कि फिटनेस आधार पर तय की जाए। प्रदर्शन में हिमाचल के अलावा पंजाब के ऑपरेटरों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।
सोमवार को ऑल हिमाचल प्रदेश टैक्सी ऑपरेटर्स एंड ड्राइवर्स वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़ी सैकड़ों टैक्सी यूनियनों ने शिमला के चौड़ा मैदान में प्रदर्शन किया। उन्होंने एलान किया कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। एसोसिएशन की अगुवाई में सैकड़ों की तादाद में लोग चौड़ा मैदान में इकट्ठा हुए। प्रदर्शन में आजाद टैक्सी यूनियन से जुड़े सदस्य भी शामिल हुए। चालकों ने कहा कि टैक्सियों के लिए सरकार की ओर से तय 12 साल की परमिट अवधि उचित नहीं है।
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ऑल हिमाचल टैक्सी ऑपरेटर एवं ड्राइवर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राम रत्न ने कहा कि वाहनों की उम्र नहीं, बल्कि फिटनेस को परमिट का आधार बनाया जाना चाहिए। एसोसिएशन का तर्क है कि फिटनेस मानकों पर खरे उतरने वाले वाहनों को 12 साल बाद भी हिमाचल स्टेट परमिट देकर सड़कों पर चलने की अनुमति मिलनी चाहिए। रोजगार के लिए खरीदी गई टैक्सी अब फायदे का नहीं, बल्कि घाटे का सौदा साबित हो रही है।
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कांगड़ा के रानीताल स्थित एटीएस सेंटर को लेकर भी विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वाहनों की पासिंग आरटीओ के तहत ही होनी चाहिए। वर्तमान व्यवस्था के कारण शिमला समेत प्रदेश के कई हिस्सों से वाहन चालकों को पासिंग के लिए 200 से 250 किलोमीटर तक दूर जाना पड़ रहा है। इससे ईंधन, समय और अन्य खर्च का अतिरिक्त बोझ वाहन मालिकों पर पड़ रहा है। एसोसिएशन ने मांग की कि पासिंग की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर आरटीओ के माध्यम से की जाए।
जीपीएस लगाने को लेकर भी यूनियन ने आपत्ति जताई। चालकों ने इसे अनावश्यक झंझट बताते हुए कहा कि जीपीएस को रिचार्ज कराने के लिए भी उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। उनका आरोप है कि जीपीएस से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कई बार वाहनों की पासिंग हो पाती है। यूनियन ने सरकार से इस व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। प्रदर्शन में मैकलोडगंज यूनियन के प्रधान अशोक शर्मा, धर्मशाला टैक्सी यूनियन के प्रधान कपिल देव, टैक्सी मैक्सी एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष अभी ठाकुर, चेयरमैन ऑल हिमाचल प्रदेश टैक्सी ऑपरेटर एसोसिएशन रविंद्र शर्मा, अध्यक्ष राजधानी टेंपो ट्रैवलर एसोसिएशन शिमला अंकित भारद्वाज समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
पंजाब की टैक्सियों से रोड टैक्स वसूली का विरोध
आजाद टैक्सी यूनियन पंजाब से आए चरनजीत सिंह कलसी ने पंजाब से आने वाली टैक्सियों से लिए जा रहे स्टेट रोड टैक्स पर सवाल उठाया। पहले करीब 100 से 200 रुपये लिए जाते थे जबकि अब 900 से 1000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। उन्होंने प्रदर्शन को लेकर कहा कि यहां इसके लिए अनुमति ली जाती है, जबकि पंजाब में उन्हें किसी तरह की अनुमति नहीं लेनी पड़ती। समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह उपमुख्यमंत्री के गृह जिले में भी प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शन के दौरान टैक्सी ऑपरेटरों ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी भी की।
सीएम 25 साल पुरानी गाड़ी में आते हैं, हम पर पाबंदी क्यों
चौड़ा मैदान में बैठे प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को वाहन मालिकों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री 25 साल पुरानी गाड़ी में विधानसभा पहुंच सकते हैं तो टैक्सी वाहनों के लिए अलग-अलग तरह की पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं। यूनियन ने सरकार से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान करने की मांग की।