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आईटीसी से सुलझा टैक्स विवाद, वन टाइम सेटलमेंट में 27.85 करोड़ चुकाए
Fri, 25 Dec 2020 11:24 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 25 Dec 2020 11:24 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद पहले के सभी टैक्स संबंधी वादों को एकमुश्त निपटाने के लिए आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से शुरू की गई एचपी लीगेसी केस रेसोल्यूशन स्कीम के तहत एक बड़ा सेटलमेंट हुआ है। नामी कंपनी मेसर्स आईटीसी के साथ साल 2010 से चल रहे राज्य कर को लेकर कानूनी विवाद को इस स्कीम के तहत 27.85 करोड़ रुपये में वन टाइम सेटलमेंट कर सुलझा लिया गया है।
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दरअसल, कंपनी पर तत्कालीन अधिकारियों ने स्थानीय क्षेत्र में वस्तुओं के प्रवेश पर टैक्स लगाया था, जिसे कंपनी प्रबंधन ने 2010 में हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। हाईकोर्ट के आदेश पर कंपनी ने टैक्स का एक हिस्सा जमा कर दिया और 25.32 करोड़ की बैंक गारंटी जमा कर दी। इसके बाद से लगातार यह मामला लटका हुआ था।
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इस बीच प्रदेश सरकार 2019 में स्कीम लेकर आ गई। स्कीम के तहत इस तरह के कर के अलावा एचपी वैट एक्ट, एची टैक्स ऑन लग्जरी इन होटल एंड लॉजिंग एक्ट, सीएसटी एक्ट के पुराने एरियरों व लंबित असेसमेंट केसों का निस्तारण करना था। आईटीसी के मामले में सोलन के स्थानीय अधिकारियों ने जिला प्रभारी हिमांशु पवार के नेतृत्व में कंपनी प्रबंधन से संपर्क कर उनको स्कीम के बारे में बताया और केस वापस लेकर इसके जरिये निस्तारण के लिए मना लिया।
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इसके बाद इस लंबित टैक्स विवाद को सुलझा लिया गया। आबकारी एवं कराधान आयुक्त रोहन चंद ठाकुर ने कहा कि इस स्कीम के तहत सभी पात्र डीलर अपने पुराने वादों का एक बार में सेटलमेंट कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस स्कीम के तहत आवेदन करने की अंतिम तारीख 21 जनवरी 2021 रखी गई है।