हिमाचल विधानसभा चुनाव में इन भाजपा सांसदों की होगी परीक्षा, ये है टारगेट
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कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर करने में भाजपा का मिशन 2017 उनके सांसदों का भी कद तय करेगा। केंद्रीय नेतृत्व ने सांसदों के लक्ष्य तय कर दिए हैं। जिन विधानसभाओं से सांसदों को बढ़त मिली है, उन्हें उसे बरकरार रखना है।
प्रदेश में लोकसभा प्रतिनिधित्व की तस्वीर इस बार वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव से बिलकुल उल्ट है। अब भाजपा के पांच सांसद हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में कांगड़ा, मंडी, शिमला और हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की 68 सीटों से 59 पर भाजपा आगे रही थी।
भाजपा के पक्ष में रहे 53 फीसदी से अधिक मतदान को बरकरार रखने में सांसदों का कड़ा इम्तिहान होना है। ऐसे में सांसदों पर अपने क्षेत्रों में भाजपा का प्रदर्शन सुधारने का दबाव है। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव में चारों सीटों पर क्लीन स्वीप से गदगद भाजपा की अब विधानसभा में असल परीक्षा है।
केंद्रीय नेतृत्व ने चारों सांसदों के लक्ष्य तय कर दिए हैं। प्रचार रथों की कमान सौंपने के बाद उनसे हर विधानसभा की जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।
हर लोकसभा सीट में 17 विधानसभा सीटें
प्रदेश में 68 विधानसभा सीटें चारों लोकसभाओं में समान रूप से वितरित हैं। हर लोकसभा क्षेत्र में 17 सीटें हैं, जिसमें वर्ष 2014 में आए चुनावों के दौरान अधिकांश विधानसभाओं से भाजपा आगे रही।
टिकट आवंटन में भूमिका होगी तय
उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड की तरह भाजपा हिमाचल में भी सांसदों की प्रत्याशी चयन में जवाबदेही तय करेगी। सांसदों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उन्हें अपने क्षेत्र की 17 सीटों पर जिताऊ प्रत्याशियों का पैनल मांगा जा सकता है। केंद्रीय नेतृत्व प्रत्याशी चयन अपने सर्वेक्षणों की रिपोर्ट के आधार पर करेगा, लेकिन सांसदों के पैनल का मिलान किया जाएगा।
यहां जानिए 2014 का रिपोर्ट कार्ड
सांसद शांता कुमार (कांगड़ा ) - सभी 17 विधानसभाओं पर भाजपा आगे रही थी। यह आंकड़ा सांसद शांता के लिए चुनौतियां बढ़ाने वाला है। वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव में कांगड़ा में भाजपा का बेहद खराब प्रदर्शन रहा है। कांग्रेस के तीन मंत्री जीएस बाली, सुधीर शर्मा, सुजान सिंह पठानिया इसी जिले से हैं। कांगड़ा में 15 सीटें सरकार बनाने में सबसे अहम साबित होने वाली हैं।
सांसद अनुराग ठाकुर (हमीरपुर ) - 17 सीटों से भाजपा केवल एक सीट हरोली विधानसभा में पिछड़ी थी। अनुराग के लिए इस जीत को बरकरार रखने के लिए खासे प्रयास करने होंगे। हरोली कैबिनेट मंत्री मुकेश अग्निहोत्री की सीट है। इसके अलावा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू की सीट नादौन भी उनके क्षेत्र में आती है। हालांकि भोरंज उपचुनाव में मिली जीत भाजपा की मजबूती दिखाती है।
सांसद विरेंद्र कश्यप (शिमला) - 3 विधानसभा सीटों श्रीरेणुका, शिलाई, रोहडू में भाजपा पिछड़ी थी। सांसद के लिए शिमला जिले में भाजपा को बढ़त दिलाने की सबसे बड़ी चुनौती है। यहां से कैबिनेट मंत्री विद्या स्टोक्स और धनीराम शांडिल हैं, लेकिन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कारण क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है। हालांकि, नगर निगम चुनाव में भाजपा की जीत भाजपा के पक्ष में है।
सांसद रामस्वरूप शर्मा (मंडी) - लोकसभा चुनाव में सबसे खराब स्थिति मंडी की रही। पांच विधानसभा सीटों भरमौर, लाहौल, सिराज, रामपुर और किन्नौर में भाजपा पीछे रही थी। कांग्रेस के तीन मंत्री ठाकुर कौल सिंह, प्रकाश चौधरी और अनिल शर्मा इसी क्षेत्र से आते हैं। सांसद के सामने मंत्रियों के सीटों के अलावा बढ़त दिलाना खासा चुनौती भरा रहेगा।