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अवैध कटान मामले में चौंकाने वाला खुलासा

Tue, 25 Nov 2014 03:24 PM IST
Updated Tue, 25 Nov 2014 03:24 PM IST
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taradevi tree cutting case: police investigation reveals many facts.

राजधानी के तारा देवी मंदिर के पास पांच सितारा होटल बनाने के लिए 477 पेड़ों की हत्या कर दी गई है। सरकारी एजेंसियों की ओर की गई जांच में यह तथ्य सामने आया है। जंगलात महकमे के प्रधान मुख्य अरण्यपाल और उपायुक्त शिमला ने सोमवार शाम तक अपनी रिपोर्ट प्रधान सचिव वन एवं पर्यावरण और राज्य को भेज दी थी।

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सरकार स्तर पर अब इस रिपोर्ट का विस्तार से अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद ठोस कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि यह जमीन परमिंदर कौर की पुश्तैनी है। परमिंदर कौर अब दिल्ली में रहती है।
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उसने अपनी जमीन का चंडीगढ़ स्थित एक होटल ग्रुप से 16 करोड़ में सौदा किया है। बताया जा रहा है कि होटल ग्रुप ने उन्हें तीन करोड़ रुपये बतौर एडवांस भुगतान भी कर दिया है। हालांकि होटल बनाने के लिए सरकार से अनुमति नहीं ली गई है। यह सौदेबाजी सितंबर 2014 में की गई है।
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कहीं धारा 118 का उल्लंघन तो नहीं?

taradevi tree cutting case: police investigation reveals many facts.

जांच रिपोर्ट में ही यह तसवीर सामने आई है कि जिस ने पेड़ कटवाए हैं, उसका नाम प्रवीण शर्मा है। बताया जा रहा है कि वह परमिंदर कौर का मुलाजिम है, लेकिन परमिंदर कौर ने प्रवीण को अपना मुलाजिम मानने से मना कर दिया है। ऐसे में सरकार यह भी पड़ताल कर रही है कि कहीं यह धारा 118 का उल्लंघन करके सौदेबाजी तो नहीं की गई।

जमीन मालकिन का बेटा पहुंचा थाने
तारादेवी जंगल के समीप हुए पेड़ कटान मामले में जमीन की मालकिन की बेटा वकील के साथ थाना बालूगंज पहुंचा। महिला के बेटे का कहना है कि चंडीगढ़ की एक पार्टी के साथ जमीन को लेकर कोई एग्रीमेंट हुआ था। अंदेशा जताया कि उन्होंने ही इस घटना को अंजाम दिया।

शिकायत में कहा गया है कि पेड़ काटने में उनका कोई हाथ नहीं है। लेकिन पुलिस के हलक से यह बात उतर नहीं रही है। क्योंकि यहां इनका कुक और माली रहते हैं। जब पेड़ों का कटान हुआ तो इन दोनों ने क्यों उन्हें सूचना नहीं दी?

आमने सामने पूछताछ कर सकती है पुलिस

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फिलहाल पुलिस ने दोनों पार्टियों को बुला कर आमने सामने पूछने का मन बनाया है उसी के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भजन देव नेगी ने कहा कि एसएचओ बालूगंज को निर्देश दिए गए हैं कि वह दोनों पक्षों को बुलाए और उनसे पूछताछ करें। इसी के बाद कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

प्रधान सचिव वन एवं पर्यावरण तरुण श्रीधर का कहना है कि जांच रिपोर्ट आ चुकी है। इसका सरकार की ओर से अध्ययन किया जा रहा है। रिपोर्ट के हर पहलू पर फोकस किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह तथ्य जरूर सामने आया है कि एक होटल ग्रुप ने इस जमीन के लिए तीन करोड़ बतौर एडवांस दिया है।

किसने काटे 477 पेड़, भूमि मालिक बेखबर

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तारादेवी मंदिर के पास जंगल में काटे गए 477 पेड़ों के मामले में पुलिस निशानदेही करवाएगी। मुसाबी हासिल करने के बाद पुलिस तहसीलदार को जमीन की निशानदेही करवाने के लिए आवेदन करेगी। निशानदेही के बाद ही पता चल पाएगा कि सरकारी भूमि और निजी भूमि पर कितने पेड़ काटे हैं।

यह तीस बीघा जमीन गुड़गांव (हरियाणा) में रहने वाले एक परिवार की बताई जा रही है। पेड़ कटान की खबर के बाद भूमि मालिक वन महकमे के अफसरों के समक्ष पेश हुए और पूरे घटनाक्रम से उन्होंने खुद को अनजान बताया। दावा किया कि उन्होंने अपनी जमीन से एक भी पेड़ नहीं काटा।

पुलिस हर पहलू की तफ्तीश कर रही है। निशानदेही के बाद ही आगामी छानबीन करने की बात कह रही है। तारादेवी मंदिर के पास 30 बीघा निजी वन भूमि पर पेड़ कटान के पीछे किसी बड़े प्रोजेक्ट के लगाने की चर्चा है। लेकिन हरे भरे पेड़ इस प्रोजेक्ट के आड़े आ रहे थे लिहाजा इन्हें तसल्ली से काटकर जंगल को साफ कर दिया गया।

किसकी शह पर काटे पेड़, अभी खुलासा नहीं

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किसकी शह पर 477 पेड़ काटे गए हैं। करोड़ों की कीमत की लकड़ी गायब है। पेड़ कटान का यह काम एक दिन में नहीं बल्कि तसल्ली से किया है। मौके पर ऐसे कई साक्ष्य मौजूद हैं। एक भी कटा पेड़ आसपास नहीं मिला। केवल पेड़ों की टहनियों को बड़े-बड़े गड्ढों में डालकर जलाया गया।

घने जंगल के बीच से गायब हुई लकड़ी का कोई सुराग नहीं है। काटे गए पेड़ कहां हैं इसका जवाब फिलहाल जांच एजेंसियों के पास नहीं है। यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रभावशाली और उच्च पदस्थ के लोगों की मिलीभगत के बिना इस काम को अंजाम दिया हो। पर्दे के पीछे ये कौन प्रभावशाली लोग हैं वन महकमे और पुलिस की जांच में यह सामने आ सकता है। सब की निगाहें इसी पर टिकी हैं।

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