मंडरा रहा बड़ा खतरा, अब गर्मी के मौसम में भी स्वाइन फ्लू का हमला
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स्वाइन फ्लू के आक्रमण का वक्त बदल गया है। अब ये सर्दियों के बजाय गर्मियों में भी हमला बोलने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस का स्ट्रेन बदलने पर भी यह नया बदलाव हो सकता है।
अगर ऐसा हुआ तो यह खतरे की घंटी भी हो सकती है, क्योंकि मौजूदा दवाएं इसकी रोकथाम में पूरा असर नहीं करेंगी। हिमाचल ही नहीं बल्कि राज्य से बाहर की बड़ी प्रयोगशालाओं में भी स्ट्रेन बदलने के संदेह पर जांच चल रही है।
माना जा रहा है कि नए स्ट्रेन के संदेह की ये जांच पाजिटिव आई तो हिमाचल या इसके पड़ोसी राज्यों के लिए ही नहीं बल्कि देश-दुनिया के लिए भी गंभीर बात होगी। वर्ष 2009 में दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत के कई अन्य राज्यों समेत हिमाचल में पहुंचा स्वाइन फ्लू वायरस का एच -1 एन -1 पिछले कुछ सालों में जनवरी से मार्च महीने तक ही सक्रिय रहता था और गर्मियों में निष्क्रिय हो जाता था।
मगर अबकी यह मई माह में ही मरीजों पर हमला बोल गया है। हिमाचल में इसकी चपेट में आए कुछ लोग तो पिछले दिनों में जान भी गंवा चुके हैं। हालांकि, चिकित्सकों का मानना है कि ये मौतें इस वायरस के कारण रोगरोधी क्षमता घटने और इसी बीच अन्य बीमारियों से हुई हैं। अगर स्ट्रेन में हल्का बदलाव आया भी होगा तो भी ये खुद बहुत ज्यादा खतरनाक नहीं होगा, क्योंकि बदले हुए रूप में भी ये एंडेमिक अवस्था में ही होगा।
यहां जानिए क्या कहते हैं अधिकारी
निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. बलदेव कुमार का कहना है कि पिछले वर्षों में स्वाइन फ्लू का वायरस हिमाचल में जनवरी से मार्च महीने के बीच ही अधिक सक्रिय रहा है। मगर इस बार मई महीने में इसकी सक्रियता नई बात है। ऐसा क्यों हो रहा है, इसकी जांच हो रही है।
उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू पर जागरूकता अभियान जोरों पर है और अस्पतालों में भी पर्याप्त दवाएं और संबंधित उपचार सामग्री है। स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय के सर्विलेंस अधिकारी डॉ. राकेश रोशन भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल ही नहीं, बल्कि बाहरी राज्यों में भी स्वाइन फ्लू के हमले का वक्त बदला है।
इस वायरस के नए स्ट्रेन में बदलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन अभी इस बारे में प्रयोगशालाओं में जांच चल रही है। अभी यह महज संदेह ही है।