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Himachal News: मुख्यमंत्री बने रहेंगे सुक्खू, बागी छह कांग्रेस विधायकों की सदस्यता रद्द, हाईकोर्ट में चुनौती

Thu, 29 Feb 2024 11:26 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 29 Feb 2024 11:26 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के बाद कांग्रेस हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि सुखविंद्र सिंह सुक्खू मुख्यमंत्री बने रहेंगे। पर्यवेक्षकों ने एलान किया कि हाईकमान ने सुक्खू के नेतृत्व पर भरोसा जताया है और उन्हें क्लीन चिट दे दी है।

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sukhvinder Sukhu will remain the Chief Minister, membership of six rebel Congress MLAs cancelled, challenge gi
पर्यवेक्षकों के साथ सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू, प्रतिभा सिंह, विक्रमादित्य व अन्य। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार पर तीन दिन से चल रहा सियासी संकट थमता दिख रहा है। पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के बाद कांग्रेस हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि सुखविंद्र सिंह सुक्खू मुख्यमंत्री बने रहेंगे। पर्यवेक्षकों ने एलान किया कि हाईकमान ने सुक्खू के नेतृत्व पर भरोसा जताया है और उन्हें क्लीन चिट दे दी है। पर्यवेक्षकों के मनाने के बाद विक्रमादित्य सिंह ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा भी वापस ले लिया। इसके बाद वह कैबिनेट बैठक में शामिल हुए। उधर, हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने दलबदल कानून के तहत बागी छह कांग्रेस विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी है। इसके तुरंत बाद बागी विधायकों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती भी दे दी है।

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गुरुवार सुबह 11:00 बजे विधानसभा अध्यक्ष पठानिया ने दलबदल कानून के तहत बागी विधायक सुधीर शर्मा, राजेंद्र राणा, रवि ठाकुर, देवेंद्र कुमार भुट्टो, चैतन्य शर्मा और इंद्रदत्त लखनपाल की सदस्यता रद्द करने का एलान किया। व्हिप जारी करने के बावजूद बजट पारित करने के दिन विधानसभा में मौजूद न रहने पर इन पर कार्रवाई की गई है। पठानिया ने कहा कि छह कांग्रेस विधायक जानबूझकर गैरहाजिर रहे। दलबदल कानून के तहत वे ऐसा नहीं कर सकते हैं, इसलिए उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द करने का फैसला सुनाया गया है। उन्होंने कहा कि खरीद-फरोख्त की अलोकतांत्रिक परंपरा को हतोत्साहित करना भी मद्देनजर रखा गया है।
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दोनों पक्षों को विस्तार से सुनकर ही यह फैसला सुनाया गया है। वहीं, राजनीतिक हलचल के बाद दो दिन से शिमला में डटे हाईकमान की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षकों डीके शिव कुमार और भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार पांच साल तक सत्ता में बनी रहेगी। विधायकों में समन्वय बनाने के लिए छह सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसमें मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री होंगे। इनके अलावा तीन अन्य सदस्य कांग्रेस हाईकमान तय करेगा। वहीं, विक्रमादित्य सिंह के इस्तीफा वापस ले लेने की जानकारी भी पर्यवेक्षकों ने प्रेस वार्ता में दी।

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अब किसके पास कितने विधायक
छह विधायकों को बर्खास्त करने के बाद हिमाचल प्रदेश विधानसभा में 68 के बजाय 62 सदस्य रह गए हैं। कांग्रेस के 34, भाजपा के 25 और तीन निर्दलीय विधायक हैं। निर्दलीय विधायकों ने राज्यसभा सदस्य के चुनाव में भाजपा का साथ दिया है। अगर वे भाजपा के साथ बने रहते हैं तो भी भाजपा के पास 28 सदस्य होंगे। यानी कांग्रेस सरकार के पास वर्तमान में बहुमत है। राज्य सरकार में बने रहने के लिए 32 विधायक होने चाहिएं। अगर छह बागियों की बहाली हो जाती है तो ही कांग्रेस के लिए फिर से परेशानी हो सकती है। वहीं, दिनभर गहमागहमी के बीच कांग्रेस विधायक दल और भाजपा विधायकों ने बैठक की। कांग्रेस सरकार को स्थिर करने में जुटी हुई है तो भाजपा आगामी रणनीति बनाने में लगी रही।

हाईकोर्ट से राहत न मिली तो उपचुनाव के बन सकते हैं हालात
सदस्यता चले जाने के बाद बर्खास्त विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी है। हाईकोर्ट के फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। अगर फैसला बागी विधायकों के पक्ष में नहीं आया तो छह महीने के भीतर छह सीटों पर उपचुनाव के हालात भी बन सकते हैं।

भाजपा को ऑपरेशन लोटस के लिए चाहिए 12 विधायक
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. कमल मनोहर शर्मा ने कहा कि छह कांग्रेस विधायकों की सदस्यता रद्द करने का निर्णय कांग्रेस सरकार के लिए संजीवनी बन गया है। अब भाजपा को आपरेशन लोटस के लिए 12 विधायकों को अपने पक्ष में करना होगा, जो मौजूदा परिस्थिति में संभव नहीं है। ऐसा करने पर ही कांग्रेस विधायकों पर दलबदल कानून लागू नहीं होगा।

विधानसभा में पहले और अब की स्थिति
पहले
कुल विधानसभा सदस्य : 68
कांग्रेस विधायक : 40
भाजपा विधायक : 25
निर्दलीय विधायक : 3
बहुमत के लिए जरूरी : 35

अब
कुल विधानसभा सदस्य : 62
कांग्रेस विधायक : 34
भाजपा विधायक : 25
निर्दलीय विधायक : 3
अब बहुमत के लिए जरूरी : 32

विधायकों ने दलबदल विरोधी कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया : पठानिया
 विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा है कि दलबदल विरोधी कानून में छह विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया है। अब यह विधानसभा सदन के सदस्य नहीं रहे। दलबदल कानून में सभी छह बागी विधायकों की सदस्यता को सदन से बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आया राम और गया राम की बात या खरीद-फरोख्त होने की स्थिति को भी उन्हें देखना होता है।  पठानिया ने कहा कि छह विधायकों के खिलाफ संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विधानसभा सचिवालय को दलबदल कानून के तहत याचिका दी थी। इन बर्खास्त विधायकों ने चुनाव कांग्रेस पार्टी से लड़ा, लेकिन सदन में दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को सुना गया।

उन्होंने कहा कि बुधवार चार बजे सुनवाई शुरू हुई और छह बजे तक चली। इसमें बागी विधायकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि समय दिया जाए। उन्हें कहा गया कि यह रिकॉर्ड का मामला है। छह विधायक बजट पारित करते समय उपस्थित नहीं हुए। अब इन्हें विधानसभा के सदस्य पद से अयोग्य घोषित किया गया है। अब सदन के सदस्य नहीं हैं। पठानिया ने कहा कि हालांकि यह आदेश न्यायिक जांच का विषय होगा। इन विधायकों को ई-मेल और व्हाट्सएप से सूचित कर दिया गया था। अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने 30 पन्नों का विस्तृत फैसला दिया है।

रजिस्टर में हस्ताक्षर किए, 5,000 रुपये दैनिक भत्ता मिलता है विधायकों को
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायकों ने रजिस्टर में हस्ताक्षर किए। इसका उन्हें 5000 रुपये दैनिक भत्ता मिलता है। वे परिसर में उपस्थित होने के बावजूद वित्त विधेयक का पारण करने के समय उपस्थित नहीं हुए।

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