सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ज्वालामुखी मंदिर में गैर हिंदुओं की नियुक्तियों पर उठाए सवाल
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त्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश को लेकर उठे विवाद की आंच हिमाचल प्रदेश तक पहुंच गई है। कांगड़ा जिले में स्थित शक्तिपीठ ज्वालामुखी में तैनात रहे दो गैैैर हिंदू अधिकारियों की नियुक्ति के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद भले ही डीसी कांगड़ा ने दोनों को स्थानांतरित कर दिया है, लेकिन रविवार को वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के एक ट्वीट के बाद सोशल मीडिया में प्रदेश की जयराम सरकार निशाने पर आ गई है। स्वामी ने ट्वीट कर गैर हिंदुओं की नियुक्ति पर अपनी ही सरकार को सवालों के घेरे में ला दिया है।
स्वामी के इस ट्वीट के बाद हजारों की संख्या में लोगों ने ट्वीट कर इस नियुक्ति को लेकर नाराजगी जताई है। डीसी कांगड़ा राकेश प्रजापति का कहना है कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान इन दोनों युवकों को नौकरी दी गई थी। हालांकि, तब भी वे रेस्ट हाउस में नियुक्त हुए थे। दोनों को जानकारी सामने आने के बाद मंदिर परिसर से 30 किलोमीटर दूर स्थानांतरित कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कैसे और क्यों मंदिर में उन्हें नौकरी दी गई।
2017 में हुई थी अस्थाई नियुक्ति
दो कर्मचारियों की नियुक्ति पर कुछ दिन पहले हिमगिरि हिंदू महासभा ने प्रशासन के समक्ष विरोध जताया था। कांग्रेस के शासनकाल में इन दो कर्मचारियों को वर्ष 2017 में लंगर सेवादार के रूप में अस्थायी नियुक्ति मिली थी। कुछ माह पहले इन दोनों गैर हिंदू धर्म के कर्मचारियों का सरकार ने नियमितीकरण किया है।
विरोध के बाद किया था ट्रांसफर
हिंदू संगठनों के विरोध के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर मंदिर अधिकारी तहसीलदार निर्मल सिंह ने तत्काल प्रभाव से गैर हिंदू धर्म के इन दो कर्मचारियों को मंदिर न्यास ज्वालामुखी से करीब तीन दिन पहले स्थानांतरण कर जिलाधीश कार्यालय धर्मशाला भेज दिया था।