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स्कूल पहुंचने से पहले नदी लेती है ‘इम्तिहान’
ब्यूरो/अमर उजाला, कोटखाई
Updated Tue, 09 Dec 2014 01:54 PM IST
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स्कूल पहुंचने से पहले यहां गिरी नदी बच्चों का इम्तिहान लेती है। कड़ाके की ठंड और खून जमा देने वाला नदी का पानी। ऊपर से हादसे का खतरा। बच्चे मजबूर हैं। अभिभावक चिंतित। सुनने वाला कोई नहीं। यह परेशानी झेल रहे हैं प्रगति नगर और आसपास के करीब 50 छात्र।
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इन्हें शिक्षा ग्रहण करने के लिए राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गुम्मा जाना पड़ता है। बीच में गिरी नदी है। कई बार पुल की मांग उठ चुकी है लेकिन आश्वासन से आगे बात नहीं बढ़ी है। स्कूल पहुंचने के लिए प्रगति नगर तथा आसपास के गांवों से करीब पचास बच्चे हर दिन गिरी नदी को पार करते हैं।
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सरकार से कई बार स्कूल के साथ प्रगति नगर में पुल बनाने की मांग की गई लेकिन अभी तक सरकार की ओर से पुल बनाने की पहल नहीं हो रही है। स्कूल के कार्यकारी प्रधानाचार्य प्रेम रोल्टा ने बताया कि बच्चे प्रगति नगर से गुम्मा स्कूल के लिए गिरी नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं और वापस घर जाते हैं। इसमें खतरा है।
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पढ़ाई की नहीं, जान की चिंता
स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष दया नंद चौहान, उपप्रधान निशा चौहान, तारा देवी, सीस राम, देवी सरण, मोहमद रफीक, उच्छा मोहमद, रफी मोहमद, संत राम, अनिता, विक्की ने कहा उनके बच्चे हर दिन गिरी नदी को पार करते हुए स्कूल पहुंचते हैं। बच्चों की पढ़ाई की इतनी चिंता नहीं, जितनी उनकी जान की रहती है।
बच्चों के बहने का खतरा
गुम्मा पंचायत के प्रधान सुनील चौहान ने कहा नदी में छात्रों के बहने का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा सड़क पर लगा पुल दूर होने के कारण बच्चों को आने जाने में आठ किलोमीटर पैदल सफर पड़ता है। नदी से बच्चे एक किलोमीटर में घर और स्कूल पहुंचते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि गुम्मा स्कूल के साथ पैदल पुल का निर्माण किया जाए।
बरसात में और बढ़ती हैं मुश्किलें
बरसात में नदी उफान पर होती है। कई बच्चे जान हथेली पर रख नदी पार कर जाते हैं। जो नहीं कर सकते हैं, उन्हें करीब पांच किमी का सफर अतिरिक्त करना पड़ता है। नदी पार करने से बच्चे इस सफर से बच जाते हैं। बरसात में नदी का बहाव अधिक होने पर बच्चों की जान को लेकर अभिभावक चिंतित रहते हैं। नदी में जलस्तर अधिक होने पर कई बच्चे स्कूल ही नहीं जाते हैं।