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गांव में बत्ती गुल रहने से परेशान छात्र ने जूतों से पैदा कर दी बिजली

Tue, 14 Nov 2017 12:40 PM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, सोलन
राकेश शर्मा/अमर उजाला, सोलन Updated Tue, 14 Nov 2017 12:40 PM IST
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student harshal ratan produced electricity from shoes

गांव में अकसर बिजली गुल रहने से परेशान जनजातीय जिले किन्नौर के एक छात्र ने जूतों से ही बिजली तैयार कर दी। सरकारी स्कूल कानम के 11वीं के विद्यार्थी हर्शल रत्न विक्रमादित्य ने कंप्यूटर की पुरानी हार्ड डिस्क को तोड़कर जूतों में फिट होने वाला एक डिवाइस तैयार किया है। 

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चलते समय जैसे ही भार जूते में लगे डिवाइस पर पड़ता है तो दबाव से बिजली पैदा होने लगती है। इस बिजली को पावर बैंक में इक्ट्ठा कर मोबाइल चार्ज किया जा सकता है। जनजातीय क्षेत्र के इस बाल वैज्ञानिक का मॉडल इन दिनों नौणी विश्वविद्यालय सोलन में प्रदर्शित किया गया है। 
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उसके इस मॉडल को खूब सराहना मिल रही है। पूरे हिमाचल से 800 बाल वैज्ञानिक अपने शोध मॉडलों को लेकर यहां पहुंचे हुए हैं। 
हमीरपुर के भोटी स्कूल की जमा दो की एक छात्रा श्रेया ने सोलर अलार्म ईजाद किया है। 


इसे भूस्खलन संभावित क्षेत्र में लगाने के बाद जैसे ही पहाड़ी से पत्थर गिरने लगेंगे तो तुरंत अलार्म बजेगा। ऐसे में हाईवे पर आवाजाही रोककर दुर्घटना से बचा जा सकता है। श्रेया ने प्रदर्शनी में अपने अलार्म का डेमो भी दिया। 
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बता दें कि बीते अगस्त माह में मंडी के कोटरोपी में भूस्खलन की चपेट में एक बस आ गई थी जिसमें करीब 50 लोगों की जान चली गई थी। श्रेया को इस हादसे ने भी झकझोरा।

अस्पताल में ग्लूकोज की बोतल खत्म होते मिलेगा संदेश 

student harshal ratan produced electricity from shoes

सिरमौर जिले के  राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मोगीनंद के 11वीं के छात्र अभिषेक ने परिचारिका सतर्कता यंत्र विकसित किया है। इसका इस्तेमाल अस्पतालों में ग्लूकोज या खून की बोतल चढ़ाने में किया जा सकता है।

जैसे ही ग्लूकोज की बोतल खाली होगी उसका वजन कम होने पर स्टैंड में लगे अलार्म को छू जाएगी। इससे नर्स और तीमारदार को इसकी सूचना मिल जाएगी।

स्मार्ट सिटी और सीवेज प्लांट

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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखू शिमला के विकास ने स्मार्ट सिटी और इसमें प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर कम से कम खर्च पर आधुनिक व्यवस्था की रूपरेखा प्रस्तुत की। रामपुर की शैरेन ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जरिये खाद बनाने और पानी को दोबारा इस्तेमाल करने लायक बनाने के तरीके दर्शाए। 

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